तुम हो मां
तुम हो मां
मेरी गीता,मेरी कुरान तुम हो मां,
इस सिमटी हुई जमीन का खुला आसमान तुम हो मां।
बुझी हुई जिंदगी का रोशन चिराग तुम हो मां,
मेरी ईद का चांद,मेरी दीवाली की शाम तुम हो मां।
तपती धूप में ठंडा अहसास तुम हो मां,
दूर रहकर भी हरपल पास तुम हो मां।
जब होती हूं उदास तुम मेरी आवाज सुनते ही जान जाती हो मां,
बताओ ना मुझे परेशानी मेरी कैसे पहचान जाती हो मां।
ईश्वर रूपी मूर्तिकार की शिद्दत से तराशी हुई मूरत हो तुम मां,
सच कहूं ” पद्मावती से भी ज्यादा खूबसूरत” हो तुम मां।
कोहिनूर से भी अनमोल हो तुम मां,
इस थकी हारी जिंदगी की paracitamol हो तुम मां।
मेरा God,खुदा और भगवान तुम हो मां,
“दो शब्दो” में सिमटा हुआ मेरा पूरा जहान तुम हो मां।
चाहे “रवीना” तुम्हे अपने भाग्य में हर बार लिखवाऊ मां,
जन्म जब भी लू धरती पर,तेरी ही कोख पाऊं मां।

रवीना
( हिसार, हरियाणा )







