उसके आँखों में सुहाल होगा
उसके आँखों में सुहाल होगा

उसके आँखों में सुहाल होगा

उसके आँखों में सुहाल होगा
और कहाँ इस जहाँ में येसे मिराल होगा

हुस्न-ए-अंदाज़ से टुटा था जो दील
अब जुड़ने में मुहाल होगा

हालत-ए-हाल जो हमारी है
ये उसी का कमाल होगा

इसी आरज़ू के साथ अर्सो से जिए जा रहे है
के कभी तो विसाल होगा

जेहन में ही नहीं कल क्या हो, नजाने क्या होगा
‘अनंत’ अब किस तरह से ये आशनाई तेरी मुक़म्मल होगा

शायर: स्वामी ध्यान अनंता

 

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