वाणी और पानी -ध्रुव-1
वाणी और पानी – ध्रुव-1
वाणी की मधुरता
हमारे ह्रदय द्वार
को सही से
खोलने की कुंजी है
पानी जीवन पर्यन्त
हमारे साथ सदैव
रहने वाला होता है
वह हमारे जीवन में
रिश्ते भी काफी
महत्वपूर्ण होते हैं
पहन ले हम चाहे
कितने भी क़ीमती
वस्त्र या आभूषण
पर वाणी बता देती है
कि व्यक्ति कितने पानी में
जैसे कोयल और काग
दिखते एक जैसे
बोल मीठे सुन
कोयल के दिल जीत लेते
पर कर्कश वाणी काग की
कर्ण को न पल भाते
हमारे द्वारा सभी रिश्तो को
निभाने के लिए मधुर
वाणी के साथ-साथ
सोच- समझकर
बोलना भी जरूरी है
नहीं तो सुधरता हुआ
कोई काम भी बिगड़
जाता हैं और रिश्तो में
खटास भी आ जाती हैं
क्रमशः आगे ।

प्रदीप छाजेड़
( बोरावड़)
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