Sach kamjor ho raha hai

सच कमजोर हो रहा है | Sach kamjor ho raha hai

सच कमजोर हो रहा है

( Sach kamjor ho raha hai )

 

सच में , सच कमजोर हो रहा है ।
झूठ का ही चारो तरफ शोर हो रहा है।।

 

कदम कदम पर लोग खूब झूठ बोले
झूठ और लूट में ईमान सबका डोले।
सच का किसे ज्ञान है, झूठ का ही ध्यान है
झूठ में ही मानव भाव विभोर हो रहा है ….
सच में०……

 

बढ़ गई है चोरी समाज में घुसकोरी
न्याय के भी मंदिर में हो रही है चोरी ।
बचा वही भाग है ,जहां सच का सौभाग्य है
कहीं झूठ ज्यादा कहीं थोर हो रहा है…..
सच में०……

 

राज काज हो या और दुनियादारी
हर जगह हो रही, खूब भ्रष्टाचारी ।
लूट ले खज़ाना,मिले बस बहाना
झूठ का ही धंधा घनघोर हो रहा है….
सच में ०……

 

नर भी झूठ बोले ,नारी भी झूठ बोले
मंदिर का अब तो पुजारी भी झूठ बोले।
चोर हो या सिपाही , है झूठ की कमाई
मन सबका काला तन गोर हो रहा है ….
सच में ,सच कमजोर हो रहा है

 

?

कवि : रुपेश कुमार यादव ” रूप ”
औराई, भदोही
( उत्तर प्रदेश।)

यह भी पढ़ें :-

वर्षा ऋतु आई | Varsha ritu aayi | Chaupai

Similar Posts

  • कलरव | Karlav par Kavita

    कलरव ( Karlav )   आज मनवा चहक रहा है चमन सारा महक रहा है। खिल गई कलियां सारी आंगन सारा चहक रहा है। डाल डाल पे पंछी कलरव कोयल कूक रही प्यारी। वृक्ष लताएं सब लहराई उमंगों भरी कलियां सारी। तितली उड़ती भंवरे गाते मनमयूरा झूमके नाचे। पंछी परवाज मौज भरे पुष्प मोहक उपवन…

  • मन के मुलायम | मुलायम सिंह यादव पर लिखी शोक कविता

    मन के मुलायम  ( Man Ke Mulayam ) चल कर अपने जीवन पथ पर बदला समाज अपने बल पर निज प्यार लुटाया कर भरकर की राजनीति खूब चढ़ बढ़कर अर्पित है सुमन तमाम तुम्हें, शत्-शत् नमन प्रणाम तुम्हें।   साहित्य आपको प्यारा था शिक्षक  बहुत  दुलारा  था जन प्यार आपका न्यारा था जन  धरती- पुत्र …

  • लंपी वायरस | Lumpy virus par kavita

    लंपी वायरस ( Lumpy Virus )   हजारों मवेशियों को निगल चुकीं आज यह बीमारी, बड़ी चुनौती बन गया आज लंपी वायरस यें बीमारी। ख़ासतौर राजस्थान में जिसका टूट रहा कहर भारी, संक्रमित पशु से फ़ैल रहीं दूसरे पशुओ में महामारी।। त्वचा पे गांठें बन जाना चारा ना खाकर सूख जाना, न घूमना न फिरना…

  • सुमन हिय के खिल गये | Geet

    सुमन हिय के खिल गये ( Suman hiye ke khil gaye )   मुस्कान लबों पर आए, सब मिल गीत गाए। खुशियों की बारिश में, हमको नहाना है। उर प्रेम भाव पले, आशाओं के दीप जगे। प्यार भरे दीप हमें, दिलों में जगाना है।   भाव उर में खिल उठे, सपने सुनहरे सजाना है। रौनक…

  • जय मां भारती | Jai Maa Bharti

    जय मां भारती ( Jai maa bharti )   शत शत बार नमन वंदन कोटि कोटि बार प्रणाम कर गए आजाद गुलामी से लाखों लाखों बार उन्हें सलाम लेकिन,अब बारी हमारी है यदि,देश की माटी प्यारी है देश बचाना होगा सत्ता लोभी से छली,कपटी, टुच्चे और भोगी से नव भारत का निर्माण करें आओ मत…

  • ओ निर्मोही | Kavita o nirmohi

    ओ निर्मोही ( O nirmohi )   ओ निर्मोही ओ निर्मोही चले गए क्यों, छोड मुझें परदेश। तपता मन ये तुम्हें बुलाए, लौट के आजा देश। तुम बिन जीना नही विदेशिया,पढ लेना संदेश। माटी मानुष तुम्हे बुलाए, छोड के आ परदेश।   2. चटोरी नयन  चटोरी नयन हो गयी, पिया मिलन की आस में। निहारत…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *