Lumpy virus par kavita

लंपी वायरस | Lumpy virus par kavita

लंपी वायरस

( Lumpy Virus )

 

हजारों मवेशियों को निगल चुकीं आज यह बीमारी,
बड़ी चुनौती बन गया आज लंपी वायरस यें बीमारी।
ख़ासतौर राजस्थान में जिसका टूट रहा कहर भारी,
संक्रमित पशु से फ़ैल रहीं दूसरे पशुओ में महामारी।।

त्वचा पे गांठें बन जाना चारा ना खाकर सूख जाना,
न घूमना न फिरना कही पर बस खूॅंटी से बंधे रहना।
ऐसे लक्षण से समझे दिखाऍं तुरन्त पशु शफाखाना,
कीचड़ मच्छरों से बचाये और धुॅंआ स्प्रे रोज़ करना।।

आज नहीं मिल रही है जगह पशु-शव दफनाने की,
हर राज्य में ज़रूरत है अब कठोर क़दम उठाने की।
दूध में कमी आ गई प्रभावित डेयरी व प्रशासन भी,
लक्षण-कारण जानकर ज़रूरत है बचाव करनें की।।

विशेषकर गायें और भैंसें इससे हो रही है यह-चित,
बहुत राज्यों में इससे आज लाखों पशु है प्रभावित।
गोटपाॅक्स एवं शिपपाॅक्स फैमिली के है यें वायरस,
आज प्राणघातक बन गया होना चाहिए सर्वविदित।।

यें लंपी वायरस भी है खतरनाक कोरोना के समान,
बरस रहा है कहर जिसका गाय बैल भैस पे तमाम।
कोई तो ढूंढ़ो इसका ईलाज़ एवं करों जल्दी ऐलान,
गौवंश की रक्षा के लिए साथियों करों ‌धर्म के काम।।

रचनाकार : गणपत लाल उदय
अजमेर ( राजस्थान )

Similar Posts

  • जीवन के इस धर्मयुद्ध में | Poem jeevan ke dharmayudh mein

    जीवन के इस धर्मयुद्ध में ( Jeevan ke is dharmayudh mein )   जीवन के इस धर्मयुद्ध में, तुमको ही कुछ करना होगा। या तो तुमको लडना होगा, या फिर तुमको मरना होगा। फैला कर अपनी बाहों को, अवनि अवतल छूना होगा, या तो अमृत बाँटना होगा, या खुद ही विष पीना होगा।   एक…

  • अनमोल है बिटिया | Anmol Hai Bitiya

    एक अनमोल रत्न है बिटियाखुशियों की सौगात है बिटिया सुबह की पहली किरण है बिटियाघर आंगन महकाती है बिटिया मां की परछाई होती है बिटियादो परिवारों का मान बढ़ाती है बिटिया सबके मुकद्दर में कहां होती है बिटियामाता-पिता का दुख समझती है बिटिया थोड़ी नटखट थोड़ी शैतान होती है बिटियासंस्कार और शिक्षा से समाज को…

  • कवि गोपालदास नीरज

    कवि गोपालदास नीरज नमन है, वंदन है, जग में तुम्हारा पुनः अभिनंदन है,लाल है भारत के, आपके माथे पर मिट्टी का चंदन है।पद्मश्री हो आप, पद्म भूषण से सम्मानित हुए आप हो,प्रणाम है आपको, आपका बारंबार चरण वंदन है।। खो गए मस्त गगन में प्रेम का गीत पढ़ा करके हमको,चले गए जग को कितने मधुर…

  • किस पर लिखूँ | Poem kis par likhu

    किस पर लिखूँ ( Kis par likhu )    1. आखिर,किस पर क्या लिखूँ || कलम उठा ली हांथ मे, कागज कोरा ले लिया | बैठा गया मै सोच के, किसी परी पर कविता लिखूँ |  आखिर,किस पर क्या लिखूँ || 2.लिखने बैठा तो सोच मे पड गया, किस-किस की अदाएं लिखूँ | मगर दिख…

  • बलिदानी गुरु गोविन्द सिंह

    बलिदानी गुरु गोविन्द सिंह देशभक्ति का खून रग-रग में दौड रहा था,स्वाभिमान से दुश्मनों को वह तोड रहा था।देश खातिर साहसी सर झुकाते रहे गुरूवर,तलवार धर्म पर बलिदान हेतु मोड़ रहा था। राष्ट्रभक्त, धर्मनिष्ठ, त्यागी वीर गुरु गोविन्द,धन्य गुजरी माता, पिता तेगबहादुर और हिन्द।खालसा पंथ निर्माण कर सिक्ख किया एकजुट,बचपन से कुशल कवि दार्शनिकता दौड…

  • सैनिक | Sainik kavita

    सैनिक  ( Sainik )    वो सैनिक है, वो रक्षक है || 1.न हिन्दू है न मुस्लिम है, वो केवल मानव राशी हैं | न दिन देखें न रात पता हो, वो सच्चे भारतबासी हैं | चाहे गर्मी हो या बर्फ जमे, अपना कर्तव्य निभाते हैं | खुद जान गंवा कर सीमा पर, हिन्दुस्तान बचाते…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *