Ishrar par kavita

मत करो इसरार जी | Ishrar par kavita

मत करो इसरार जी

( Mat karo ishrar ji )

 

हर किसी को चाहिए, अधिकार ही अधिकार जी।
कोई भी करता नहीं , कर्तव्यहित व्यवहार जी।।

बिन दिए मिलता नहीं है, बात इतनी जान लो,
प्यार गर पाना है तो, देना पड़ेगा प्यार जी।।

दूसरो को दोगे इज्जत, होगी तब हासिल तुम्हें,
कब भला मिलता है मांगे से यहां सत्कार जी।।

आदमी हो आदमी ही, क्यों नहीं बनते हो तुम,
जानवर सा आचरण, करते हो क्युं हर बार जी।।

जो सभी को माफ़ कर दे, उससे बढ़कर कौन है,
सोचिएगा क्या मिला, रखकर सदा प्रतिकार जी।।

हर किसी की ख्वाइशें, “चंचल” कहां पूरी हुईं,
जो मिला उसमें रहो खुश, मत करो इसरार जी।।

 

कवि भोले प्रसाद नेमा “चंचल”
हर्रई,  छिंदवाड़ा
( मध्य प्रदेश )

 

यह भी पढ़ें :-

बात बात में अलगाव की | Kavita baat baat mein algav ki

 

 

Similar Posts

  • दोस्त | Kavita Dost

    दोस्त ( Dost ) ( 2 ) दोस्त बिना है जीवन अधूरा लड्डू सी है गजब दोस्ती आटा संग जैसे रमे बूरा बिन कहे पहचान सब जाए ह्दय मन हलचल का हाल पूरा मित्रता नमक और पानी धरती और फसल धानी ना शर्म झिझक ना कोई बने ज्ञानी कृष्ण सुदामा की अनुपम कहानी बचपन से…

  • मुस्कुराना चाहिए | Muskurana chahiye | Kavita

    मुस्कुराना चाहिए ( Muskurana chahiye )   गीत कोई प्यारा लगे तो गुनगुनाना चाहिए। देख कोई अपना लगे तो मुस्कुराना चाहिए।   प्यार में शर्ते नहीं संबंध निभाना चाहिए। हंसकर सबसे मिले प्रेम जताना चाहिए।   अपनापन अनमोल मोती खूब लूटाना चाहिए। पल दो पल हमको भी सदा मुस्कुराना चाहिए।   आंधी तूफान आते जाते…

  • कल की खबर नहीं | Kal ki Khabar Nahi

    कल की खबर नहीं! ( Kal ki khabar nahin )    कल की खबर नहीं देख तू मेरे साथ चल, जिन्दगी की है डगर कठिन मेरे साथ चल। फिजाओं में घुली है आज चारों तरफ भांग, कल कोई फूल बिछाए न बिछाए साथ चल। जिन्दगी का सफर है देखो बहुत ही बड़ा, कल चराग़-ए-दिल जले…

  • कहां तक | Kahan Tak

    कहां तक ( Kahan Tak )   सिमटते गए भाव मन के घुलती रहीं मिठास में कड़वाहटें बढ़ तो गए किताबी पन्नों में आगे पनपत्ति रही मन की सुगबुगाहटें जगमगाती रहीं चौखटे, मगर आंगन घर के सिसकते रहे बढ़ते गए घर ,घर के भीतर ही खामोश बच्चे भी सुबगते रहे खत्म हुए दालान, चौबारे सभी…

  • बोले कोयलिया | Bole koyaliya

    बोले कोयलिया ( Bole koyaliya )   कोयलिया कुहू कुहू बोले। वन उपवन में लता कुंज में, मधुरस के घट खोले। पवन बह रही है बासंती, करती जनरुचि को रसवंती, बौराई अमराई सारी, मादकता सी घोले। हुई मंजरित डाली डाली, मुग्ध भाव से देखे माली, एक-एक तरु की फलता को, मन ही मन में तोले।…

  • तेरा वोट का है अधिकार | Kavita Tera Vote ka Hai Adhikar

    तेरा वोट का है अधिकार ( Tera Vote ka Hai Adhikar )   नेता करते सभी से प्यार, अरे, रे! बाबा, न बाबा। उन्हें सौंपो फिर से कमान, अरे, रे! बाबा, हाँ बाबा। नेता करते सभी से प्यार, अरे, रे! बाबा, न बाबा। तुम पोलिंग बूथ पे जाओ, एक अपनी बटन दबाओ। तुम भी निकलो…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *