Mazdoor

मजदूर पर कविता | Mazdoor

मजदूर पर कविता

( Mazddor par kavita )

 

दोजून निवाला सही से नसीब ना हुआ
मेरे हाथो आज तेरा सुंदर महल बन गया
अपना तो झोपड़े में गुजारा हो गया
कभी ठंड मे ठीठुर कर मैं सो गया
कभी बारिश में भीग कांपता
रह गया,
कभी पसीने से लथपथ हो गरम थपेड़े सह गया
मेरे हाथो आज तेरा सुंदर महल बन गया
एयर कंडीशनर लगाकर तुम परेशान हो
मै तो बरगद की खुली हवा मे धन्य हो गया
यूं हिकारत से देखो ना मुझे तुम
मेरी मेहनत से ही तुम्हारा घर रोशन हो गया

 

डॉ प्रीति सुरेंद्र सिंह परमार
टीकमगढ़ ( मध्य प्रदेश )

यह भी पढ़ें :-

 

नवदुर्गा पर कविता | Maa Durga Kavita

 

Similar Posts

  • खरीद खरीद कर थक गया हूं | Kavita Khareed Khareed kar

    खरीद खरीद कर थक गया हूं ( Khareed khareed kar thak gaya hoon )   सेनेटाइजर खरीदा खरीदा आक्सीमीटर मास्क साथ में हैण्डवाश लाया आयुष काढ़ा तब जबकि आमदनी हुई आधा पीया गिलोय तुलसी का रस नारियल पानी भी ठसम ठस कभी पैरासिटामोल तो कभी खरीदा मल्टी विटामिन कभी डेक्सामेथासोन एजीथ्रोमाइसीन । टीवी अखबार में…

  • सावन फुहार | Kavita Sawan Fuhaar

    सावन फुहार ( Sawan Fuhaar ) रिमझिम जो सावन फुहार बरसी, जमीं को बुझना था फिर भी तरसी, जो बिखरीं जुल्फों मे फूटकर के, वो बूंद जैसे जमीं को तरसी, रिमझिम जो…………. हमारे हाॅथों मे हाॅथ होता, पुकार सुनकर ठहर जो जाते, बहार ऐसे न रूठ जाती, बरसते सावन का साथ पाते, अजी चमन मे…

  • जज़्बातों की दास्तान | Poem on Jazbaat in Hindi

    जज़्बातों की दास्तान ( Jazbaaton ki dastaan )   जीवन की आधी रातें सोच-विचार में और आधे दिन बेकार हो गए, जो थे आंचल के पंछी अब हवा के साहूकार हो गए, हर रोज़ कहती है ज़िंदगी मुझसे जाओ तुम तो बेकार हो गए, हम भी ठहरे निरे स्वाभिमानी, लगा ली दिल पर चोट गहरी,…

  • किस मूरत को हम पूजे

    किस मूरत को हम पूजे किस मूरत को हम पूजे, जिसमें प्राण प्रतिष्ठा है। या मन मन्दिर में मेरे जो, जिसमें मेरी निष्ठा है।।१ बिना प्राण की मूरत पूजे,क्या मुझको फल देगी । मेरी विनय पुकार सुनेगी, मेरे कष्टों का हल देगी।।२ जिस मूरत में प्राण भरा है ,वह मूरत क्या सच्ची है । जिसमें…

  • हिन्दी | Hindi Par Kavita

    हिन्दुस्तान के हिन्दी हैं हम  ( Hindustan ke Hindi Hai Hum ) १. बड़ी मधुर मीठी है , सुन्दर है सुरीली है | दिल को छू लेने वाली, नाजुक और लचीली है | हर हिंदुस्तानी की जुवां, पर राज है उसका | ऐसी हमारी राष्ट्र भांषा, हिन्दी अलबेली है | हिन्दुस्तान के हिन्दी हैं हम…

  • बेख़बर हूं | Bekhabar Hoon

    बेख़बर हूं ( Bekhabar Hoon )    जलता है खैरलांजी, जलता है मेरा मन गोहाना की राख सुलगती है अब भी मेरे लहू में, गोधरा की ट्रेन से झांकती वे मासूम आंखें करती हैं मेरा पीछा, बदायूं के बगीचे में शान से खड़े पे़ड़ पर टंगी दो लाशें दुपट्ट्टे पर खून के धब्बे, धब्बों में…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *