Delhi

दिल वालों की दिल्ली | Delhi

दिल वालों की दिल्ली

( Dilwalon ki Dilli ) 

 

महाभारत काल से है दिल्ली,
जो इंद्रप्रस्थ में थी पहले दिल्ली।
पहला शहर तोमर राजा ने बनाया,
जो लाल कोट शहर कहलाया।।

हुमायु और मोहम्मद गोरी आया,
तुर्को का आगमन वहां छाया।
सात बार शहर बना और उजड़ा,
सोमेश्वर राजा निड़र था योद्धा।।

पृथ्वीराज ने फिर लिया कमान,
उम्र था केवल जिसका १४ साल।
स्वतन्त्र विजय पाया हर बार,
दिग्विजयी कहलाएं ये चौहान।।

लालकोट लाल किला व तालाब,
किले में बसाया कस्बा और गाँव।
पांडवो की राजधानी थी दिल्ली,
आज भारत की राजधानी दिल्ली।।

दिल्ली से देहली हुआ ये आज,
दिल वाले देहली में रहते है आज।
राष्ट्रपति भवन और संसद भवन,
कुतुबमीनार है देहली में आज।।

जंतर-मंतर और लाल किला,
बिरला मंदिर गुरुद्वारा है अपार।
राजपथ चाहे शहीद स्मारक,
दरगाह मकबरा देहली में आज।।

पर्यटन का केन्द्र है यही ख़ास,
विदेशी पर्यटक आते हर मास।
उदय लिखे कविता फिर आज,
दिल्ली से ही है सभी को आस ।।

 

रचनाकार : गणपत लाल उदय
अजमेर ( राजस्थान )

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