Sanket

संकेत | Sanket

संकेत

( Sanket ) 

 

बेहतर है कल के लिए
कल को भुला देना
कल की संभावनाओं मे
आज को बांधा नही करते..

मान लो की वह एक मौका था
उनको समझ लेने का
अब आपको ही अपनी समझ से
आगे का सफर तय करना है…

बीते का तो केवल पदचिन्ह ही शेष है
आपके लिए तो कल ही विशेष है
जो सीखे हो वह भी कम तो नही
अपर्याप्त मे भी पर्याप्त शेष है….

रास्ते ही जनक हैं रास्तों के
चलने का प्रयास जरूरी है
मिल गई जब पहचान उनकी
तब स्वयं को भी समझ लेना जरूरी है..

उम्मीद,साथ,सहयोग ये सब भ्रम हैं
आपके लिए आप ही सबसे सफल हैं
उठो और चलो,इसी मे है जीत आपकी
बैसाखी से तुम कभी दौड़ नही सकते….

 

मोहन तिवारी

 ( मुंबई )

यह भी पढ़ें :-

सारथी | Sarathi

Similar Posts

  • मोक्ष की ओर बढ़ें | Moksh

    मोक्ष की ओर बढ़ें! ( Moksh ki ore badhen )   हे ! उसकी कृपा बरसे, दुनिया सदा हरषे। आकर के जग में, प्रभु की शरण में, मोक्ष की ओर बढ़ें। हे! उसकी कृपा बरसे, दुनिया सदा हरषे। साँसों के तारों से, जीवन की धारों से, मिलके जहां से चलें । हे ! उसकी कृपा…

  • मेरी कहानी में तुम

    मेरी कहानी में तुम पता नहीं, मेरी कहानी में तुम थे भी या नहीं,पर हर पन्ने पर तुम्हारी परछाईं दर्ज थी। कभी कोई बात,कभी कोई लम्हा,तो कभी वो खामोशियाँ,जो अब भी तुम्हारा नाम लेती हैं। मेरी कहानी में तुमसे बिछड़ने की कसक थी,अधूरे ख्वाब थे,अधूरी बातें थीं,और वो एहसास… जिसे मैं चाहकर भी बयां नहीं…

  • अंतर्राष्ट्रीय ‌मातृभाषा दिवस | Matribhasha Diwas par Kavita

    अंतर्राष्ट्रीय ‌मातृभाषा दिवस ( Antarrashtriya matribhasha diwas )    मानव जीवन में भाषा का है बड़ा ही महत्व, २१ फरवरी को मनाते जिसका हम उत्सव। अंतर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस होता इस रोज़, ज़िन्दगी में इसके बिना कुछ नही अस्तित्व।। अनेंक प्रकार की भाषा कई तरह की बोली, कोस कोस पर बदलती भाषा और कहानी। सारे विश्व…

  • Ghazal | उलझन

    उलझन ( Uljhan ) क्यों  उलझा  है  शेर हृदय तू, बेमतल की बातों में। जिस संग मन उलझा है तेरा, तू ना उसके सासों में। मना  ले  अपने चंचल मन को, वर्ना तू पछताएगा, प्रेम पतित हो जाएगा फिर,रूक ना सकेगा आँखो में। इतना ज्ञान भरा है तुझमें, फिर.भी क्यो अंजान रहे। इकतरफा है प्यार…

  • जल बिन | Kavita

    जल बिन ( Jal Bin )   इकदिन समंदर भी सूख जाएगा व्यर्थ पानी बहाया जा रहा  घर-घर लगाकर समरसेबुल व्यर्थ पानी बहाया जा रहा    जहां थी जरूरत सभी को इक गिलास पानी की वहां चलाकर समरसेबुल व्यर्थ पानी बहाया जा रहा   पानी का कीमत इक दिन जाकर मैं मछलियों से पूछा, वो…

  • बदल रहा है जीवन का ही सार

    बदल रहा है जीवन का ही सार कहने को तो बदल रहा है,जीवन का ही सार। यूं तो शिक्षा के पंखों से,भरकर नयी उड़ान।बना रही हैं आज बेटियां,एक अलग पहचान।फिर भी सहने पड़ते उनको,अनगिन अत्याचार।कहने को तो बदल रहा है,जीवन का ही सार। तोड़ बेड़ियां पिछड़ेपन की,बढ़ने को हैं आतुर।इधर-उधर मन के भीतर पर,बैठा है…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *