गलतफ़हमी रही हरदम | Galatfehmi Shayari

गलतफ़हमी रही हरदम

( Galatfehmi rahi hardam ) 

 

हमारी मानते वो ये गलतफ़हमी रही हरदम
बरतने में उन्हें दिल में मिरे नर्मी रही हरदम।

जफ़ा करके भी मैं उनका भरोसा जीत ना पाई
मेरी ख़ातिर नज़र सरकार की वहमी रही हरदम।

मुझे ले डूबी ये गफ़लत की बस मेरे रहेंगे वो
मगर गैरों की जानिब उनकी सरगर्मी रही हरदम।

कभी लग जाए मेरी बात ना कोई बुरी उनको
फ़कत ये सोच कर दिन रात मैं सहमी रही हरदम।

हकीकत है फसाना है हमारे बीच में क्या है
सुनाएंगे वो हाले दिल ये खुशफ़हमी रही हरदम।

अजब दस्तूर है की सच खड़ा कोने में छिपता है
सजाए सर पे अपने ताज़ बेशर्मी रही हरदम।

बहुत है दोस्त परवर है नयन हमदर्द वो सबका
मेरी ख़ातिर ही बस लहज़े में बेरहमी रही हरदम।

 

सीमा पाण्डेय ‘नयन’
देवरिया  ( उत्तर प्रदेश )

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