Kushmanda Maa

कूष्मांडा मां | Kushmanda Maa

कूष्मांडा मां

( Kushmanda Maa ) 

 

पिंड से ब्रह्मांड तक,मां कूष्मांडा दिव्य नजारा

चतुर्थ नवरात्र अहम आभा,
सर्वत्र भक्ति शक्ति वंदना ।
असीम उपासना स्तुति आह्लाद,
दर्शन आदर सत्कार अंगना ।
अनंत नमन मां मंद मुस्कान,
त्रिलोक आलोक मंगल धारा ।
पिंड से ब्रह्मांड तक, मां कूष्मांडा दिव्य नजारा ।।

अनूप छवि अष्ट भुजाधारी,
रज रज ओज प्रसरण।
भक्तजन अलौकिक स्पर्शन,
तन मन कांति संचरण ।
सौर मंडल अधिष्ठात्री मां,
पटाक्षेप सघन तिमिर सारा ।
पिंड से ब्रह्मांड तक, मां कूष्मांडा दिव्य नजारा ।।

वनराजारूढ़ अक्षय फलदायिनी,
मां रूप भव्य श्रृंगार निराला ।
कर कमंडल धनुष बाण कमल चक्र गदा,
अमृत कलश सिद्धि निधि जपमाला ।
सुख सौभाग्य कृपालु मैया,
सर्व दुःख कष्ट संकट पार उतारा ।
पिंड से ब्रह्मांड तक,मां कूष्मांडा दिव्य नजारा ।।

सृष्टि रचना महाकाज,
त्रिदेव अप्रतिम सहयोग ।
हरित वर्ण अति प्रिया मां ,
चाहना कुम्हड़ बलि योग ।
दैहिक दैविक भौतिक ताप मुक्ति,
मां आदि शक्ति परम सहारा ।
पिंड से ब्रह्मांड तक, मां कूष्मांडा दिव्य नजारा ।।

 

महेन्द्र कुमार

नवलगढ़ (राजस्थान)

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