मिलके दीवाली मनायेंगे | Diwali ke Upar Shayari

मिलके दीवाली मनायेंगे

( Milke diwali manayenge ) 

 

उसे घर आज अपने ही बुलायेंगे
उसे ही खीर उल्फ़त की खिलायेंगे

बढ़ेगा प्यार दीवाली से हर दिल में
सभी के साथ में दीपक जलायेंगे

मिटेंगे सब अंधेरे नफ़रतों के ही
मुहब्बत के यहाँ दीप झिलमिलायेंगे

ढलेंगे दिन वतन से ही गमों के सब
ख़ुशी हर चेहरे पे ही राम लायेंगे

दिवाली दें रही पैगाम उल्फ़त का
घरों पे दीप देखो जगमगायेंगे

भुला दो नफरतें दिल से सभी अपने
सभी मिलके ही दीवाली मनायेंगे

मुहब्बत का जलाकर दीप ऐ आज़म
गले इक दूसरे को ही लगायेंगे

 

शायर: आज़म नैय्यर
(सहारनपुर )

यह भी पढ़ें :-

तिरंगो से सज़ा देखो वतन है | Tirango se Saja

Similar Posts

  • सुराही जाम टकराने लगे हैं

    सुराही जाम टकराने लगे हैं नज़र मंज़र ये क्या आने लगे हैंचमन में फूल मुरझाने लगे हैं सियासत चल रही है ख़ूब उनकीजो ख़ाबों से ही बहलाने लगे हैं वज़ीरों की सियासत देखियेगाबदलकर केचुली आने लगे हैं बनाकर गीदड़ों ने फौज अपनीवो शेरों पर ही गुर्राने लगे हैं भिखारी बन के जो आये थे कल…

  • तेरा इक दिवाना हूँ

    तेरा इक दिवाना हूँ तेरा इक दिवाना हूँ क़ाफ़िर नहीं हूँअसल में जो मैं हूँ वो जाहिर नहीं हूँ जुबाँ हूँ अदा-ए-फिजा हूँ फ़ना हूँयक़ीनन मैं जो हूँ क्यों आखिर नहीं हूँ जहाँ तक तिरा साथ मुझको चलूँगायुँ कुछ वक्त का मैं मुसाफ़िर नहीं हूँ लिखूँगा मैं लिखता नया ही रहूँगाथकूँ राह में ऐसा शाइर…

  • देश की अज़्मत बढ़ानी चाहिए

    देश की अज़्मत बढ़ानी चाहिए बात तो अहल-ए-ख़िरद यह भी सिखानी चाहिएहर बशर को देश की अज़्मत बढ़ानी चाहिए ऐ मेरे मालिक ये तेरी मेहरबानी चाहिएकाम आये सब के ऐसी ज़िंन्दगानी चाहिए दे गया मायूसियाँ फिर से समुंदर का जवाबजबकि मेरी प्यास को दो बूँद पानी चाहिए क्यों भला पकड़े हुए हो रहबरों की उँगलियाँराह…

  • प्यार में मुझको हद से गुज़र जाने दो

    प्यार में मुझको हद से गुज़र जाने दो प्यार में मुझको हद से गुज़र जाने दो ।आज मन की मुझे अपने कर जाने दो मुझको खुशियाँ दो या अश्क भरपूर दो,ये कटोरा किसी से तो भर जाने दो॥ मुझसे वादा ख़िलाफ़ी न हो पाएगी ,वो मुकरता अगर है  मुकर जाने दो॥ मैं तरफ़दारी ज़ालिम की…

  • सितम का वार है | Sitam ka Vaar Hai

    सितम का वार है ( Sitam ka Vaar Hai ) उसकी जानिब ही सितम का वार हैआदमी जो वक़्त से लाचार है जिसको रब की नेमतों से प्यार हैवो ख़िजाँ में भी गुल-ओ-गुलज़ार है जिसके दम से हैं बहारें हर तरफ़अब उसी की सिम्त हर तलवार है लुट रही सोने की चिड़िया जा ब जाआज…

  • सनम का हाल | Ghazal Sanam ka Haal

    सनम का हाल ( Sanam ka Haal ) बह्र : बहरे हज़ज मुसद्दस सालिम अरकान: मुफ़ाईलुन मुफ़ाईलुन मुफ़ाईलुन मात्रा भार : 1222 1222 1222   हसीं चेहरा गुलाबी गाल अच्छा है, हाथों तूने लिया रुमाल अच्छा है ! मचलती इस जवानी पर खिला यौवन, तेरी जुल्फों का बिखरा हाल अच्छा है ! मेरे जैसे दिवाने…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *