Mujhe Apna Bana Lo

मुझे अपना बना लो | Mujhe Apna Bana Lo

मुझे अपना बना लो

( Mujhe Apna Bana Lo )

 

मुझे अपना बना लो
सनम दिल में बसा लो //1

नहीं रक्खो ख़फ़ा दिल
गले से तुम लगा लो //2

हसद दिल से मिटेगा
मुहब्बत की दवा लो //3

सनम रिश्ता न तोड़ो
मुहब्बत से निभा लो //4

बचोगे नफ़रतों से
मुहब्बत की दुआ लो //5

न फेरों यूं निगाहें
नज़र आज़म मिला लो //6

शायर: आज़म नैय्यर
(सहारनपुर )

यह भी पढ़ें :-

वतन की ख़ातिर | Watan ki Khatir

Similar Posts

  • कमाल करते हो | Kamaal Karte ho

    कमाल करते हो ( Kamaal karte ho )    लगाकर चाँद पर दाग कमाल करते हो, बातें बड़ी आजकल बेमिसाल करते हो। बेचैन हो जाता दिल मेरा बातें सुन तुम्हारी, खुद से क्यों नहीं तुम ये सवाल करते हो? यूँ उलझा नहीं करते हर बार ही किसी से, बेवज़ह तुम हर बात पर बवाल करते…

  • साथ जिनके | Ghazal Saath Jinke

    साथ जिनके ( Saath Jinke ) हाँ वही खुशनसीब होते हैं साथ जिनके हबीब होते हैं अपनी हम क्या सुनाये अब तुमको हम से पैदा गरीब होते हैं तुमने देखा न ढंग से शायद किस तरह बदनसीब होते हैं पास जिनके हो रूप की दौलत उनके लाखों रक़ीब होते हैं प्यार जिनको हुआ नहीं दिल…

  • हँसकर मिलते हो | Hans Kar Milte ho

    हँसकर मिलते हो ( Hans Kar Milte ho )   जो तुम यूँ हँसकर मिलते हो फूलों के माफ़िक लगते हो ग़म से यूँ घबराना कैसा आख़िर इससे क्यों डरते हो तुम जैसा तो कोई नहीं,जो माँ के चरणों में रहते हो गाँव बुलाता है आ जाओ क्यों तुम शहरों में बसते हो नफ़रत के…

  • फूल तितली सनम हुए बे-रंग

    फूल तितली सनम हुए बे-रंग क़ाफ़िया – ए स्वर की ‌बंदिश रदीफ़ – बे-रंग वज़्न – 2122 1212 22 फूल तितली सनम हुए बे-रंग इंद्रधनुषी छटा दिखे बे-रंग तेरी खुशबू जो ज़िंदगी से गई रात-दिन मेरे हो गए बे-रंग ये मुहब्बत सज़ा बनी है आज दौर-ए-हिज़्राँ लगे मुझे बे-रंग याद जब तेरी आती है मुझको…

  • हवा रुक जायेगी

    हवा रुक जायेगी गर ख़ुदा रहमत करे तो हर बला रुक जायेगीजल उठेंगे बुझते दीपक यह हवा रुक जायेगी इसलिए हाकिम के आगे रख दिये सारे सबूतजुर्म साबित हो न पाये तो सज़ा रुक जायेगी साथ तेरे हैं अगर माँ की दुआएं ख़ौफ़ क्यातेज़ तूफाँ में भी कश्ती नाख़ुदा रुक जायेगी बेवफ़ाई से तेरी परदे…

  • हुए हैं किसी के

    हुए हैं किसी के करम जब से हम पर हुए हैं किसी केमज़े आ रहे हैं हमें ज़िन्दगी के पड़े हम को मँहगे वो पल दिल्लगी केफँसे प्यार में हम जो इक अजनबी के किया उसने दीवाना पल भर में मुझकोहुनर उस पे शायद हैं जादूगरी के निगाहों से साग़र पिलाने लगे वोमुक़द्दर जगे आज…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *