मेरे यार से तुम मुखातिब करा दो | Mere Yaar Se

मेरे यार से तुम मुखातिब करा दो

मेरी कैफ़ियत को मुनासिब करा दो,
मुहब्बत का मसला है वाज़िब करा दो।

रहेगा ये अहसान मुझ पर हमेशा
मेरे यार से तुम मुखातिब करा दो।

दुआ ना दया को किसी से कहेंगे
सनम बस हमारे मुसाहिब करा दो !

रहेगी शिकायत न जग से कभी फिर,
ज़रा इक मुलाक़ात वाज़िब करा दो !

करे इल्तिजा हम सभी से यही बस,
मुहब्बत ‘धरम’ की मरातिब करा दो !!

डी के निवातिया

डी के निवातिया

यह भी पढ़ें:-

Similar Posts

  • मुफलिसी मुफलिसी नहीं होती | Muflisi Muflisi Nahi Hoti

    मुफलिसी मुफलिसी नहीं होती ( Muflisi Muflisi Nahi Hoti ) बज़्म महफ़िल हसीं नहीं होती Iजब तलक तू कहीं नही होती II इश्क दौलत अजीब है जिसमे Iमुफ़लिसी मुफलिसी नहीं होती II फायदा देख जब किया जाए Iवो कभी दोस्ती नहीं होती II हुस्न उम्मीद तिश्नगी धोखा Iफलसफा इश्क की नहीं होती II लफ्ज़-जज़्बात है…

  • तेरी याद में | Yaad Shayari in Hindi

    तेरी याद में ( Teri yaad me )  जमाना ख़राब हो गया तेरी याद में, मैं अधमरा हो गया हूं तेरी याद में। कितनों को वफ़ा का सबक सिखाओगे, खुद बेवफ़ा हो गया मैं तेरी याद में ‌। जिस्म से खेलने का हूनर मुझे नहीं है, मुझे ख़्वाब आने लगें तेरी याद में। जी नहीं…

  • हो नहीं सकता | Emotional Ghazal in Hindi

    हो नहीं सकता ( Ho nahi sakta ) भरोसा अब कभी उस पर दुबारा हो नहीं सकता छुड़ाया हाथ जिसने वो हमारा हो नहीं सकता। बहारों के धनक के रंग सारे देख कर सोचा विसाले यार से दिलकश नज़ारा हो नहीं सकता। निगाहों ने निगाहों से बहुत सी गुफ़्तगू कर ली बिना दिल की रज़ा…

  • रौशन करें | Roshan Karen

    रौशन करें ( Roshan Karen ) तीरगी में प्यार का ऐसा दिया रौशन करेंहो उजाला जिसका हर सू वो वफ़ा रौशन करें लुत्फ़ आता ही कहाँ है ज़िन्दगी में आजकलमौत आ जाए तो फिर जन्नत को जा रौशन करें मतलबी है ये जहाँ क़ीमत वफ़ा की कुछ नहींहुस्न से कह दो न हरगिज़ अब अदा…

  • काश ऐसा कमाल हो जाए | Kaash Aisa Kamaal ho Jaye

    काश ऐसा कमाल हो जाए ( Kaash Aisa Kamaal ho Jaye ) काश ऐसा कमाल हो जाए। उससे फिर बोलचाल हो जाए। वो अगर हम ख़याल हो जाए। ज़िंदगी बेमिसाल हो जाए। देखले गर उसे नज़र भर कर। पानी-पानी हिलाल हो जाए। उसके होंठों पे लफ़्ज़े हां हो तो। ह़ल मिरा हर सवाल हो जाए।…

  • भर भर दुआ देने लगे

    भर भर दुआ देने लगे हम बुज़ुर्गों पर तवज्जो जब ज़रा देने लगेवो मुहब्बत से हमें भर-भर दुआ देने लगे घर के आँगन में खड़ी दीवार जब से गिर गयीनाती पोतों के तबस्सुम फिर मज़ा देने लगे मिट गये शिकवे गिले जब भाइयों के दर्मियाँएक दूजे के मरज़ में वो दवा देने लगे आ रहींं…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *