बोल नहीं जुटेंगे उनके
बड़ा झोल है मन में उनके
संरक्षण में पलने वाले
मौका खोजते कब भड़ास निकालें?
बारी जब विपक्ष की हो!
सत्ता पक्ष आते ही,
कैसे छिपा लें?
कैसे दबा दें?
नमक का कर्ज जल्द कैसे चुका दें?
भाव सदा रखें यही
चीख चीखकर कहें यही
ढ़ूंढ़ते बहाने हजार
चाहे चल जाए लाठी तलवार
नहीं रह गये अब निष्पक्ष-
जो कहलाते थे पत्रकार।
लोकतंत्र में मचेगा हाहाकार
जब चौथा खंभा ही करने लगेगा व्यापार
तो सोचों!
फिर बचेगा क्या यार?
गोंद के लड्डू गोंद के लड्डू, मीठे से स्वाद,सर्दी की सर्द रातों में, गर्मी का फरमाया आबाद।ताजगी से भरी, एक खजाना छुपा,इनमें तो बसी है, सेहत की हर एक ख़ुशबू। गोंद के लड्डू, नारी की सेहत के लिए वरदान,बचपन से बुढ़ापे तक, सबके लिए बनाए गए इनका अनोखा सामान।खुशबू बिखेरे इनसे, स्वाद में कुछ खास…
भय ( Bhay ) उथले पानी में तैरे तैरे फिर भी डर कर तैरे पास पड़ी रेत मिली पैरों के धूमिल चिन्ह मिले लहर पानी की जो आई उन चिन्हों को मिटा गई भय के मोहपास के कारण मोती की आशा मिलने की खाली मेरे हाथ रहे कुएं में रहने वाला मेंढक खुद को…
“कुंभलगढ़ के शेर” (महाराणा प्रताप पर समर्पित एक भावनात्मक, प्रेरणादायक और गौरवपूर्ण कविता) कुंभलगढ़ की गोद में जन्मा, मेवाड़ का लाल, वीर प्रताप, सिंह सा गर्जे, जिसने रण में ढाया काल। धूप-छाँव में पला बढ़ा वो स्वाभिमानी माटी का गौरव राजपूताना की शान बना, जो झुका नहीं, बना प्रमाण। पिता उदयसिंह के आँगन में, जयवंता…
आंखों में अश्कों के समंदर रो रहे हैं ( Aankhon Mein Ashkon Ke Samandar Ro Rahe hain ) आँखों में अश्कों के समंदर रो रहे हैं! ग़म मुहब्बत के कई मेरे अंदर रो रहे हैं! मिट गया झगड़े में नामो निशान घर का, और दहलीज़ पे बैठे खंडहर रो रहे हैं! …
वो माँ तो आखिर मां होती ( Wo maa to akhir maa hoti ) तुम्हारे जैसा कोई नहीं है मैय्या इस सारे-ब्रह्माण्ड में, मौत से लड़कर जन्म देती हों इंसान को नौ-माह में। सहन-शक्ति की देवी हो तुम ज़िन्दगी की हर-राह में, छाती से लगाकर रखतीं दूध पिलाती लेकर बांह में।। ईश्वरीय…
सुरेन्द्र पाल जी की स्मृति में जब दिल पत्थर हो जाएहंसते खेलते रोना आ जाएमानवीय भावनाएहमें जीवित रखने के लिएकभी डिफ़ाल्ट होना पड़ जाएहंसते खेलते रोना आ जाएजब दिल पत्थर हो जाए। पाल सर कभी खुशीयों की ताली बजवाते थेमानवता और प्रेम का हमेशा पाठ पढ़ाते थेहार को जीवित रखो विजय पथ पर बढ़ाते थेकितनों…