Aankhen Poem in Hindi

यह आंखें | Aankhen Poem in Hindi

यह आंखें

( Yah Aankhen ) 

 

यें ऑंखें कुछ-कुछ कहती है,
लगता है जैसे मुॅंह बोलती है।
अचूक निशाना साधे रहती है,
ऐसे लगता है जैसे बुलाती है।।

यें शर्माती है और घबराती है,
दीवानी मद-होश कातिल है।
फिर भी सबको यह प्यारी है,
यही काली ऑंखें निराली है।।

चाहें तुम्हारी है चाहें हमारी है,
लेकिन दुनियां यें दिखाती है।
क्या गलत एवम क्या सही है,
ऑंखें सब-कुछ समझती है।।

रोज़ नए-नए नज़ारे देखती है,
एवम पलकों में छुपा लेती है।
चाहें नीली है चाहें भूरी यह है,
यें ड्रोन जैसे कैच कर लेंती है।।

 

रचनाकार : गणपत लाल उदय
अजमेर ( राजस्थान )

यह भी पढ़ें :-

पगड़ी | Pagadi par Kavita

 

 

Similar Posts

  • निर्भीक बनो आक्रामक नहीं | Kavita Nirbhik Bano

    निर्भीक बनो आक्रामक नहीं ( Nirbhik bano akramak nahin )    निडर बने निर्भीक बने स्वाभिमानी बन जाए। आक्रामक स्वभाव उग्र मित्र कभी ना बनाए। बुलंद हौसलों से बुलंदी सफलता मेहनत पाती। मधुरागिनी कोयल काली वाणी सबको भाती। जोश जज्बा हौसलों से पराक्रमी पहचान बनो। वीर वसुंधरा भारती है बड़ी निराली शान बनो। बलवीर हो…

  • रामलला | Ram Lala

    रामलला! ( Ram Lala )   रामलला का गुण गाएँ रे, चलो खुशियाँ मनाएँ। दुल्हन के जैसी अयोध्या सजी है, सोने के जैसे देखो तपी है। हम भी तो सरयू नहायें रे, चलो खुशियाँ मनाएँ। रामलला का गुण गाएँ रे, चलो खुशियाँ मनाएँ। झन -झन कर रही उनकी पैजनियाँ, चमचम-चमकी कमर करधनियाँ। उनके चरणों में…

  • पिता | Pita kavita

    पिता ( Pita )   खुशियों का खजाना है, वो प्यार का सागर है। सर पर ठंडी छाया, पिता प्रेम की गागर है।   गोद में लेकर हमको, दुनिया दिखलाते जो। अंगुली पकड़ हमारी, चलना सीखलाते वो।   तुतलाती बोली को, शब्दों का ज्ञान दिया। ठोकर खाई जब भी, हमको थाम लिया।   जब जब…

  • तुझसे शर्माना और तुझसे मुस्कुराना

    तुझसे शर्माना और तुझसे मुस्कुराना कुछ मुस्कूराना चाहता हू हाँ तेरी बातो पर खुलकर हसना चाहता हू तेरी खिलखिलाते हुए चेहरे को देखकर मै मुस्कुराना चाहता हूं मै शर्माना चाहता हू तेरी मासूम चेहरे को देखकर तेरी मद‌होश भरी बातो पर तेरी शैतानी भरी हाथो के इधर उधर छुअन से शर्माकर अपने चेहरे पर हाथ…

  • जिंदगी

    जिंदगी ** जिंदगी की समझ, जिंदगी से समझ। जिंदगी से उलझ, जिंदगी से सुलझ। अबुझ है इसकी पहेली, तेरी मेरी ये सहेली। न मिलती यह सस्ती, ऊंची है तेरी हस्ती। कभी किया करो सख्ती, जो चाहो , चलती रहे कश्ती; संभालो कायदे से गृहस्थी। धीरज धैर्य संतोष रखो, अनावश्यक लोभ से दूर रहो। बातें कम,…

  • Kavita | थप्पड़

    थप्पड़ ( Thappad ) *** उसने मां को नहीं मारा मार दिया जहान को अपनी ही पहचान को जीवन देने वाली निशान को। जान उसी की ले ली, लिए गोद जिसे रोटियां थी बेली। निकला कपूत, सारे जग ने देखा सुबूत। हो रही है थू थू, कितना कमीना निकला रे तू? चुकाया न कर्ज दूध…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *