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सुकून की जिंदगी | Chhand sukoon ki zindagi
ByAdminसुकून की जिंदगी ( Sukoon ki zindagi ) मनहरण घनाक्षरी दो घड़ी पल सुहाने, सुकून से जीना जरा। गमों का भी दौरा आये, हंस हंस पीजिए। सुख से जियो जिंदगी, चैन आए जीवन में। राहत भरी सांस ले, खूब मजा लीजिए। भागदौड़ सब छोड़, होठों से मुस्कुराइये। सुकून की सांस मिले, जियो…

Kavita | अपना बचपन
ByAdminअपना बचपन ( Apna Bachpan ) बेटी का मुख देख सजल लोचन हो आए, रंग बिरंगा बचपन नयनों में तिर जाए । भोर सुहानी मां की डांट से आंखे मलती, शाम सुहानी पिता के स्नेह से है ढलती। सोते जागते नयनों में स्वप्निल सपने थे, भाई बहन दादा दादी संग सब अपने थे। फ्राक…

जाने दो | Jaane do kavita
ByAdminजाने दो ( Jaane do ) हे प्रिय प्रकाश को बन्द करो, अन्धियारे को तुम आने दो। कोई देख ना ले हम दोनो को, जरा चाँद को तुम छुप जाने दो। तब तक नयनों से बात करो, कोई हास नही परिहास करो। मन के भावों को रोक प्रिये, घनघोर अन्धेरा छाने दो। …

माँ कामाख्या देवी | Kamakhya Devi par Kavita
ByAdminमाँ कामाख्या देवी ( Maa Kamakhya Devi ) जो भी मां के द्वारे जाते वो खाली कोई ना आते, झोली सभी की भर देती है वह कामाख्या माते। एक-बार जाकर तो देखो तुम मैया रानी के द्वारें, दुःख एवं कष्ट सारे हर लेती वो कामाख्या माते।। ५१ शक्तिपीठों में से एक प्रसिद्ध यह शक्तिपीठ,…

दीपावली शुभकामना | Diwali shubh kamna
ByAdminदीपावली शुभकामना ( Deepawali shubh kamna ) सम्बन्धों के दीप जलाये तुमने देकर प्यार मेरे घर आँगन में करते रहे सदा उजियार ! सारे जीवन यह अपनापन बना रहे हममें दुनिया को बाँटें हम मिलकर खुशियों के उपहार ! अनजाने अनचाहे जो भी आयें अब अवरोध अपने विश्वासों से उन पर पा…

सिखों के दसवे गुरु गुरुगोबिंद सिंह जी | Guru Gobind Singh Ji Par Kavita
ByAdminसिखों के दसवे गुरु गुरुगोबिंद सिंह जी ( Poem on Guru Gobind Singh Ji in Hindi ) सिखों के दसवें गुरु, गुरु गोबिंद सिंह जी महान, याद करता रहेगा आपको सदैव ही सारा जहान। पौष-शुक्ला सप्तमी को हुआ था आपका जन्म, सन्त और लेखक बनकर बनाई अमिट पहचान।। प्रकाश पर्व के रूप में जन्मोत्सव मनाता…

