Author: Admin

  • कहां तक | Kahan Tak

    कहां तक ( Kahan Tak )   सिमटते गए भाव मन के घुलती रहीं मिठास में कड़वाहटें बढ़ तो गए किताबी पन्नों में आगे पनपत्ति रही मन की सुगबुगाहटें जगमगाती रहीं चौखटे, मगर आंगन घर के सिसकते रहे बढ़ते गए घर ,घर के भीतर ही खामोश बच्चे भी सुबगते रहे खत्म हुए दालान, चौबारे सभी…

  • ये मन्नतों के धागे | Ye Mannaton ke Dhage

    ये मन्नतों के धागे ( Ye mannaton ke dhage )    मैं बांध आई थी, एक मन्नत का धागा, मंदिर के द्वार पर। जहाँ न जाने कितनों के द्वारा मांगी गईं थी और मांगी जा रही थी हजारों मन्नतें, जानते थे तुम मेरी पीड़ा को, इसलिए कहते थे बांध आओ तुम भी एक मन्नत का…

  • राष्ट्रीय विज्ञान दिवस | National Science Day

    विज्ञान का हमको अनुपम उपहार मिला है जिसके गहन अध्ययन और ठोस चिंतन ने प्रगति के अभिनव द्वार खोले है । हम सभी यह जानते हैं कि work place पर मेहनत और हुनर सबसे ज्यादा काम आता है लेकिन बिना आत्मविश्वास और प्रसन्नता के न तो काम में संतुष्टि मिलती है और न ही किया…

  • जय जय भोलेनाथ | Jai Bholenath

    जय जय भोलेनाथ ( Jai Jai Bholenath )    काशी के वासी अविनाशी, भूतनाथ महादेव। नीलकंठ शिवशंकर भोले, सब देवों के देव। जय जय भोलेनाथ, जय जय भोलेनाथ त्रिनेत्र त्रिशूल धारी, जटा में बहती भगीरथी धारा। डम डम डमरू कर में बाजे, नटराज नृत्य प्यारा। भस्म रमाए भोले बाबा, कैलाशी शिव शंभू नाथ। भर देते…

  • क्या करें बहार का | Kya Kare Bahar ka

    क्या करें बहार का ( Kya kare bahar ka )    मस अले हज़ार हो तो क्या करें बहार का अभी उलझ रहा है कुछ हिसाब कारोबार का। याद आ रहा वही बहार में न जाने क्यूं पास है जिसे न कौल का न ही करार का। मजलिसों में देखकर नज़र चुरा रहा है वो…

  • ओज | Oj

    ओज ( Oj )   बड़े हुए तो क्या हुए जब कर न सके सम्मान किसी का  समझे खुद को अधिकारी पद का  समझ ना पाए स्वाभिमान किसी का चाहे ,खुद ही को चर्चित होना  ऊँचे आसन का मान लिए बैठे मन के भीतर समझे कमतर सबको खुद को ही प्रथम शीर्ष किए बैठे  ऐसी…

  • श्री कृष्ण प्रेम | Shri Krishna Prem 

    श्री कृष्ण प्रेम ( Shri Krishna Prem )   श्री कृष्ण प्रेम सुगंधि,श्री मद्भागवत में ********** तीन सौ पैंतीस दिव्य अध्याय, बारह प्रेरणा पुंज स्कंध । अठारह हजार श्लोक अनुपमा, शब्द आभा आनंद बंध । कथा श्रवण परम सुअवसर , सुषुप्त सौभाग्य जगावत में । श्री कृष्ण प्रेम सुगंधि,श्री मद्भागवत में ।। हिंद वांग्मय मुकुटमणि…

  • यह कहानी फिर सही | Phir Sahi

    यह कहानी फिर सही ( Yeh kahani phir sahi )    हमने कब किसको पुकारा यह कहानी फिर सही किसको होगा यह गवारा यह कहानी फिर सही आबरू जायेगी कितनों की तुम्हें मालूम क्या किसने किसका हक़ है मारा यह कहानी फिर सही रिश्तों को मीज़ान पर लाकर के जब रख ही दिया क्या रहा…

  • शौक | Shauk

    शौक ( Shauk )   जले हैं हाथ हमारे चिरागों से आग की लपटों से खेलने का शौक नहीं उठे हैं सवाल नजरों पर भी हमारे जज्बातों से खेलने का हमे शौक नहीं यकीनन होने लगी है दिल से दिल्लगी किसी के ख्वाबों से खेलने का हमें शौक नहीं जहां बिकने लगी हो चाहतें अब…

  • भटक रहा बंजारा सा मन | Bhatak Raha Banjara sa Man

    भटक रहा बंजारा सा मन ( Bhatak raha banjara sa man )   आहत इतना कर डाला है, तन-मन मेरा, गुलाबों ने, कांटों के इस मौसम में हम, क्या फूलों की बात करें। सूरज आग उगलता रहता, विद्रोही हो गईं हवाएं। परछाईं भी साथ छोड़ दे, तो फिर गीत कौन हम गायें। जिसने इतना दर्द…