Author: Admin

  • परदेस में रहा | Pardes mein Raha

    परदेस में रहा ( Pardes mein raha )  दीवारो-दर से जिसकी सदा गूँजती रही मेरी निगाह घर में उसे ढूँढती रही अहसास था ख़याल तसव्वुर यक़ीन था किस किस लिबास में वो मुझे पूजती रही मैं काम की तलाश में परदेस में रहा वो ग़मज़दा ग़मों से यहीं जूझती रही मैं लिख सका न उसको…

  • अधीर | Adheer

    अधीर ( Adheer )   बह जाने दो अश्रु को अपने कुछ तो दिल के छालों को राहत मिलेगी बातों के बोझ को भी क्या ढोना कुछ तो सोचने की मोहलत मिलेगी बांध रखा है फर्ज ने वजूद को उसे खोकर भी जिंदा रहना नहीं है अदायगी के कर्ज को चुकाना भी जरूरी है पथ…

  • छत्रपती वीर शिवाजी महाराज | Chhatrapati Veer Shivaji Maharaj

    छत्रपती वीर शिवाजी महाराज ( Chhatrapati Veer Shivaji Maharaj )  मराठा साम्राज्य नींव से,हिंदुत्व का सिंहनाद हिंद पटल उन्नीस फरवरी, अद्भुत अनुपम भाव नवेला । वर्ष सोलह सौ पचास तद तिथि, वीर शिरोमणि अवतरण बेला । विदेशी विधर्मी आक्रांता पस्त, देख शिवाजी स्व शासन शंखनाद। मराठा साम्राज्य नींव से,हिंदुत्व का सिंहनाद ।। शिवनेरी दुर्ग पुनीत…

  • छत्रपति शिवाजी महाराज | Chhatrapati Shivaji Maharaj

    छत्रपति शिवाजी महाराज! ( Chhatrapati Shivaji Maharaj )   जन्म हुआ सोलह सौ सत्ताईस में, माँ जिसकी जीजाबाई थी । शिवनेरी के उस किले में, खूब बजी बधाई थी । घर-घर दीपक जगमगा उठे, रजनी भी हुलसायी थी । क्या नारी, क्या नर, क्या बच्चे, शिवाई भी हर्षायी थी । झूम उठी थी धरती अपनी,…

  • गए वो दिन | Gaye Woh Din

    गए वो दिन ( Gaye Woh Din)    अजब इस दौर में हमने शरीफों का चलन देखा I डुबो के हाथ खूं में फिर बदलते पैरहन देखा II हुई बर्बाद कश्ती जो ,वजह है ना-ख़ुदा खुद ही I उजड़ता बाग़बाँ के सामने ही ये चमन देखा II किया था नाज़ जब कहते, मिरी हर शै…

  • तेवर | Tevar

    तेवर ( Tevar )    शिकायत होने लगी है उन्हें, मेरी हर बात पर हमने भी मान लिया, बेबात की बात में रखा क्या है गरज थी तब, मेरी हर बात थी उनके सर माथे पर, अब तो कह देते हैं बात में ऐसा रखा क्या है दौलत ही बन गया पत्थर पारस ,अब जमाने…

  • हँसकर मिलते हो | Hans Kar Milte ho

    हँसकर मिलते हो ( Hans Kar Milte ho )   जो तुम यूँ हँसकर मिलते हो फूलों के माफ़िक लगते हो ग़म से यूँ घबराना कैसा आख़िर इससे क्यों डरते हो तुम जैसा तो कोई नहीं,जो माँ के चरणों में रहते हो गाँव बुलाता है आ जाओ क्यों तुम शहरों में बसते हो नफ़रत के…

  • आदि भारती श्री चरण वंदन

    आदि भारती श्री चरण वंदन   नैसर्गिक सौंदर्य अप्रतिम, रज रज उद्गम दैविक उजास । मानवता शीर्ष शोभित पद , परिवेश उत्संग उमंग उल्लास । स्नेह प्रेम भाईचारा अथाह, अपनत्व आह्लाद संबंध बंधन । आदि भारती श्री चरण वंदन ।। विविधा अनूप विशेषण, एकत्व उद्घोष अलंकार । संज्ञा गौण कर्म पहचान, संघर्ष विरुद्ध जोश हुंकार…

  • उन्वान | Unwan

    उन्वान ( Unwan )    वो पन्ना किताब का सोचा था मुकम्मल हो गया चंद लफ्ज़ों की कमी थी उसकी बस तकमील को लम्हों की स्याही ऐसी कुछ बिखरी पन्ना नया अल्फाज़ वही मगर उन्वान ही बदल गया.. लेखिका :- Suneet Sood Grover अमृतसर ( पंजाब ) यह भी पढ़ें :- बिन तुम्हारे | Bin Tumhare

  • नाता | Nata

    नाता ( Nata )    पीना नहीं है, जीना है जिंदगी अनमोल है, खिलौना नहीं है जिंदगी उम्र तो वश में नहीं है आपकी अनुभवों से ही सीना है जिंदगी आए और आकर चले गए तो आने का मकसद ही क्या रहा हम मिले और मिलकर ही रह गए तो इस मुलाकात का वजूद ही…