Author: Admin

  • शिक्षा का व्यापार | Shiksha ka Vyapar

    रजनी एक विद्यालय में शिक्षिका है। एक दिन विद्यालय के प्रबंधक ने उसे बुलाकर कहा,-” यह तूने क्या किया? इस बच्चे को इतने कम नंबर कैसे दिया? तुम्हारे कुछ अकल है कि नहीं? यदि ऐसे ही करती रही तो एक दिन विद्यालय बंद हो जाएगा।” रजनी बहुत डर गई थी उसने डरते हुए पूछा,-” क्या…

  • खता | Khata

    खता ( Khata )    वफादारी भी जरूरी है हर किसी के साथ किंतु,हो उसी के साथ ,जो करे कद्र उसकी देख लिया है ,करके भी उनकी इज्जत हमने सिवा बदनामी के ,कुछ न मिला उनसे हमे रिश्ता है उनका ,सिर्फ उनके मतलब भर से उनकी फितरत ही नही, सगा होने की कभी न समझे…

  • गुलज़ार हो तुम | Gulzar ho tum

    गुलज़ार हो तुम ( Gulzar ho tum )   हजारों ख्वाहिशें दबी दिल में, कहीं ये दम यूं ही न निकल जाए, इंतज़ार ए उम्मीद में कहीं, आरजूओं का मौसम न बदल जाए।   रगों में खौलता ये लहू कहीं, बेसबर आंखों से न बह जाए , संभाल आंगन ये तेरे सपनों का, कहीं सपनों…

  • तेरी गुस्ताख़ बातें | Teri Gustakh Baatein

    तेरी गुस्ताख़ बातें ( Teri gustakh baatein )   तेरी गुस्ताख़ बातों से दिवाना टूट जाता है हुई थी जो ख़ता तुम से भरोसा टूट जाता है   रहें हो ना मगर अब तुम सुनाऊँ दास्ताँ किसको मोहब्बत के लिखे  नग्में फ़साना टूट जाता है   गुजारे थे शहर में वो कभी बीतें हुए पल…

  • तेरे इश्क में | Tere Ishq Mein

    राहुल एक बहुत होनहार लड़का था। बचपन से ही उसने घर की परेशानियों को देखते हुए शिक्षण कार्य करने लगा था। वह वह बच्चों को बहुत ही मेहनत से पढ़ता था और सारे बच्चे भी उस पर बहुत खुश थे। जिंदगी में हजार गम होते हुए भी हर समय वह मुस्कुराता रहता था। अभी उसकी…

  • ध्यान रहे | Dhyan Rahe

    ध्यान रहे ( Dhyan rahe )    गद्दार कभी वफादार नही हो सकता गद्दारी सिर्फ ,किसी के खून मे ही नही बल्कि वंशानुगत भी पीढ़ी दर पीढ़ी  चलती ही रहती है…. कहना मुनासिब तो नही किंतु, अपराधिक मानसिकता से उत्पन्न शिशु भी उसी का वंशधर होता है…. हर,हिरणाकश्यप के यहां प्रह्लाद का जन्म नही होता…..

  • आँचल | Aanchal

    आँचल ( Aanchal )   माँ तेरा आँचल सदा, देता शिशु को छाँव। मैल झाड़ती तू सदा, सर से लेकर पाँव।। पाऊं मैं सुख स्वर्ग सा, सोऊं आँचल ओढ़। ठुकराए जो मात को, खुशियां ले मुख मोड़।। गृह लक्ष्मी मातु बिना, सूना घर परिवार। आये विपदा लाल पर, देती सब कुछ वार।। बीच सफ़र चलते…

  • महफ़िल-ए-इश्क | Mehfil -E- Ishq

    महफ़िल -ए- इश्क ( Mehfil-e-Ishq )   महफिले इश्क में इसरार की मोहलत नहीं होती। जहां में यार से बढ़कर कोई दौलत नहीं होती।। वफ़ा के आब से ही जिंदगी में चैन मिलता है, अना के शजर पे ताउम्र की चाहत नहीं होती।। मरीजे इश्क मर भी जाय तो मतलब कहां उनको, ज़माने की अदाओं…

  • शोषण | Shoshan

    रमेश एक बेरोजगार लड़का था। उसे काम की अति आवश्यकता थी। इसी बीच उसके एक दोस्त ने कहा कि कुछ लिखने पढ़ने का काम है । करना है तो आ जाओ। वह दोस्त के साथ कम पर लग गया। दो-तीन महीना तक उसे क्या तनख्वाह मिलेगी यह भी नहीं पता चला। फिर भी उसे विश्वास…

  • बस आज बस | Bas Aaj

    बस आज बस ( Bas aaj bas )    जद्दोजहद दुश्वारियां कुछ कश्मकश बस आज बस मैं गुनगुनाना चाहती बजने दो कोई साज़ बस। वो फ़िक्र रंजो गम ज़फा तन्हाइयों की बात को तुम छोड़ दो जो हैं ख़फा रहने दो अब नाराज़ बस। हो गुफ्तगू तो बात कुछ लग जाती है उनको बुरी हमने…