माँ के साथ | Maa ke Sath
माँ के साथ ( Maa ke sath ) देख लो ढूंढ लो कोई दिख जाए तो दिखा देना, इक माँ जैसा कोई दूजा मिल जाए तो बता देना! नहीं चाह रखती है कभी माँ हमारे पैसों की, हो सके तो थोड़ा समय माँ के साथ बिता देना। मैं जानता हूँ भाई बहुत ही बिजी…
माँ के साथ ( Maa ke sath ) देख लो ढूंढ लो कोई दिख जाए तो दिखा देना, इक माँ जैसा कोई दूजा मिल जाए तो बता देना! नहीं चाह रखती है कभी माँ हमारे पैसों की, हो सके तो थोड़ा समय माँ के साथ बिता देना। मैं जानता हूँ भाई बहुत ही बिजी…
इश्क़-ए-दरख़्त ( Ishq-e-darakht ) खिड़कियों से आती हवा के झोंके सी सुहानी, मन के भीतर धुंधलाती यादों सी रूमानी, मैं कौन, अधुरी सी एक प्रेम कहानी आँसुओं से भीगी; कुछ जिस्मानी कुछ रूहानी.. मरूधरा पर उठते थमते कुंठा और संशय के बवंडर कुछ जद्दोजहद करते, दम तोड़ते भावों के भवँर मैं कौन, रात्रि…
“बहुत मजा आया। कितनी अच्छी पूड़ी कचौड़ी सब्जी बने थे ऊपर से रसगुल्ले भी मिले।’ तेरही खाकर लौट रहे सुदेश ने अपने मित्र से कहा। ” मजा तो आया भाई लेकिन यार देखो ना बीमारी के कारण शरीर सूखकर कांटा हो गया ।सारा पैसा दवाई में खर्च कर दिया । खेत भी गिरवी रख दिया…
बड़ी महंगाई बा (कजरी) जान मारत बा ढेर महंगाई पिया बचे ना कमाई पिया ना …… बड़ी मुश्किल बा जिंदगी बिताई पिया बड़ी महंगाई पिया ना…. जितना सैया हो कमाए उतना खर्चा होई जाए बचे नाही रुपया अढ़ाई पिया बड़ी महंगाई पिया ना….1 महंगा होईगा धनिया मर्चा बढ़िगा तेल जीरा खर्चा जान मारे सब्जी…
झूठी शान ( Jhoothi shaan ) पिज्जा ,बर्गर खाय के, कैंसर रहे बुलाय दाल रोटी शुद्ध सब , वोका देत भुलाय मैगी,नूडल्स,फास्ट फूड,करें गरल सो काम झूठी शान देखाय के, कमाय रहयो है नाम दूध,छाछ,गन्ना नही,कोल्ड ड्रिंक्स पीवन लगे सौ के साठ,अब पचपन माहि जावन लगे दूर किए जड़ी बूटी,खाय गोली कैप्सूल जड़ जमाए…
कहा जाता है कि जीवित जा नहीं सकता है और मरा हुआ व्यक्ति बता नहीं सकता तो आखिर स्वर्ग नरक को किसने देखा है। लेकिन देखा जाए तो इसी स्वर्ग नरक पुण्य पाप मुक्ति ईश्वर आदि के माध्यम से धर्म गुरुओं में हजारों वर्षों से समाज को गुमराह किये हुए है। देखा गया है कि…
दहेज में मां ( Dahej mein maa ) था एक लावारिस खा रहा था ठोकर दर बदर अनाथ था पता नही कौन थी मां कौन थे बाप एक दिन अचानक पढ़ाई के लिए प्रेरित किया एक दिन बन गया बड़ा अफसर लेकिन भूला नहीं अपने पिछले दिन आ रहे थे बार बार याद एक…
सहज नही होता ( Sahaj nahi hota ) द्वेष हो वहां समझौता नहीं होता ईर्ष्या हो वहां कोई सामंजस्य नहीं छल हो वहां कभी अपनापन नही कपट हो वहां कभी कोई लगाव नहीं दिखावा तो है कागज के फूल जैसा वाणी मे खार गुलाब की डाली जैसे मुस्कान मे धार दुधारी तलवार जैसे नजर…
कृष्ण दीवानी ( Krishna diwani ) प्रेम गली में ढूंढ रही, कान्हा तोहे प्रेम दीवानी। प्रेम है मेरा मन मोहन, मोहे मोहे रुप मोहिनी। कटि कारी करधन डारी, चले चाल मतवाली। कटि कमरी पीली बांधो, करधन धूधरू डारौ। पांव पैजनी बाजे छम छम, नाचै और नचावै। कान्हा ढूढे तोहे , तोरी सखी प्रेम दीवानी…
ओ भारति माॅं! ओ प्यारी माॅं! ( O Bharti maa o pyari maa ) ओ भारति माॅं ! ओ प्यारी माॅं !! हम तुझ पर हैं बलिहारी माॅं ! हम कोटि कोटि सुत हैं तेरे ! है तू ही मातु हमारी माॅं !! हम तेरा अर्चन करते हैं , हे करुणामयि उपकारी माॅं !!…