आ सनम तू प्यार कर ले | Sanam Shayari
आ सनम तू प्यार कर ले ( Aa sanam tu pyar kar le ) राह में दीवार कर ले घर अलग तू यार कर ले यूं न कर इंकार उल्फ़त प्यार तू इक़रार कर ले मत छुपा बातें कोई भी बात तू इज़हार कर ले क्या पता कब फ़िर मिले हम दो घड़ी तू…
आ सनम तू प्यार कर ले ( Aa sanam tu pyar kar le ) राह में दीवार कर ले घर अलग तू यार कर ले यूं न कर इंकार उल्फ़त प्यार तू इक़रार कर ले मत छुपा बातें कोई भी बात तू इज़हार कर ले क्या पता कब फ़िर मिले हम दो घड़ी तू…
कविताएंँ रहेंगी…… ( Kavitayen rahengi ) हृदय को संवेदना की कसौटी पर कसेंगी कुछ रहे न रहे कविताएंँ रहेंगी मेरी- तेरी ,इसकी -उसकी, मुलाकातें ,जग की बातें, जगकर्ता के क़िस्से कहेंगी कुछ रहे न रहे …….कविताएंँ रहेंगी। भागते हुए वक़्त की चरितावली संघर्ष की व्यथा -कथा विकास की विरुदावली कभी शांँति की संहिता रचेंगी…
कैसे हो दीदार सनम का ( Kaise ho deedar sanam ka ) कैसे हो दीदार सनम का पर्दे में जब प्यार सनम का रुत मस्तानी हो और यूं हो बाहें डालें हार सनम का दिल दीवाना बन जाता है ऐसा है मेआर सनम का मीठा दर्द जगाये दिल मे तीर लगे जब पार सनम…
लगी कुछ देर ( Lagi kuch der ) लगी कुछ देर उनको जानने में हां मगर जाना हमारे प्यार का होने लगा है कुछ असर जाना। कभी वो हंस दिये रहमत ख़ुदा की हो गई हम पर हुए नाराज़ तो उसको इलाही का कहर जाना। हुए ग़ाफ़िल मुहब्बत में भुला दी जात भी अपनी…
मोहब्बत की दरिया ( Mohabbat ki Dariya ) अदाओं का तेरा खजाना चाहता हूँ, जवानी का तेरा तराना चाहता हूँ। चलती जिधर फूल खिलते उधर ही, रजा चलके खुद जानना चाहता हूँ। दीवानगी कुछ चढ़ी इस कदर है, कदमों में आँखें बिछाना चाहता हूँ। भीगी-भीगी रातें जलाती हैं मुझको, लगी आग को मैं बुझाना…
मैं कोई फरिश्ता नहीं! ( Main koi farishta nahi ) इतना काफी है जमाने को बताने के लिए, आजकल आती नहीं हमको रुलाने के लिए। कहानी तैरती है उसके दिल की झीलों में, उतरती दरिया नहीं बेसुध नहाने के लिए। हुस्न की गागर वो चलने पे छलकती ही है, बढ़ती बेताबियाँ हमको जलाने के…
तयशुदा कागज़ों पर बयानी हुई ( Tayashuda kagazon par bayani hui ) तयशुदा कागज़ों पर बयानी हुई हम ग़रीबों की क्या ज़िंदगानी हुई एक पागल ने खोले थे दिल के वरक़ सारी दुनिया मगर पानी-पानी हुई तेरी आँखों में अब भी है रंग-ए-हिना इतनी संजीदा कैसे कहानी हुई उनसे मिलते ही इतने दिये जल…
मैं गुलशन का फूल नहीं हूँ ( Main gulashan ka phool nahin hoon ) मैं गुलशन का फूल नहीं हूँ लेकिन फ़िर भी बबूल नहीं हूँ तू जो करें किनारा मुझसे दिल से मैं तो शूल नहीं हूँ तू जो गले लगता नहीं है मैं ऐ यार बबूल नहीं हूँ फ़ेरे तू नज़रें क्यों…
मुहब्बत में इशारे बोलते हैं ( Muhabbat mein ishare bolte hain ) फ़लक से चाँद तारे बोलते हैं मुहब्बत में इशारे बोलते हैं तुम्हीं ने रौनक़े बख़्शी हैं इनको यहाँ के सब नज़ारे बोलते हैं बहुत गहरा है उल्फ़त का समुंदर मुसाफिर से किनारे बोलते हैं बहुत मुश्किल सफ़र है ज़िन्दगी का थके हारे…
दुष्यंत त्यागी हो गए ( Dushyant tyagi ho gaye) आत्मा आहत हुई तो शब्द बागी हो गए। कहते कहते हम ग़ज़ल दुष्यंत त्यागी हो गए। है सियासत कोठरी काजल की रखना एहतियात, अच्छे-अच्छे लोग इसमें जा के दागी हो गए। गेह-त्यागन और यह सन्यास धारण सब फ़रेब, ज़िन्दगी से हारने वाले विरागी…