बड़ा ही नेक | Bada hi Nek
बड़ा ही नेक
बड़ा ही नेक वो परिवार होगा
तभी अच्छा मिला संस्कार होगा
कभी हमने न सोचा अपने घर में
मुझे करना खड़ी दीवार होगा
जमीं तो बाँट ली तुम सबने मेरी
लवारिस अब हमारा प्यार होगा
घरों की बात थी इतना न सोचा
यही कल भोर का अख़बार होगा
अदब से बात जो करते हैं बच्चे
उन्हीं का अच्छा सा परिवार होगा
नहीं कम प्रेम दुनिया में तुम्हारी
मगर अब प्रेम का व्यापार होगा
बचा पाओगे कैसे बेटियों को
दुशासन हर तरफ तैयार होगा
करो मत राम की आशा तनय से
पिता की बात पे इंकार होगा
गली में घूमती सीता दिखेगी
नहीं पर राम को स्वीकार होगा
धरम को छोड़कर जो भी चला है
यकीं भव से नही वो पार होगा
हमारे नाम का सिंदूर ही यह
प्रखर उस माँग का शृंगार होगा

( बाराबंकी )







