बड़ा ही नेक

बड़ा ही नेक | Bada hi Nek

बड़ा ही नेक

बड़ा ही नेक वो परिवार होगा
तभी अच्छा मिला संस्कार होगा

कभी हमने न सोचा अपने घर में
मुझे करना खड़ी दीवार होगा

जमीं तो बाँट ली तुम सबने मेरी
लवारिस अब हमारा प्यार होगा

घरों की बात थी इतना न सोचा
यही कल भोर का अख़बार होगा

अदब से बात जो करते हैं बच्चे
उन्हीं का अच्छा सा परिवार होगा

नहीं कम प्रेम दुनिया में तुम्हारी
मगर अब प्रेम का व्यापार होगा

बचा पाओगे कैसे बेटियों को
दुशासन हर तरफ तैयार होगा

करो मत राम की आशा तनय से
पिता की बात पे इंकार होगा

गली में घूमती सीता दिखेगी
नहीं पर राम को स्वीकार होगा

धरम को छोड़कर जो भी चला है
यकीं भव से नही वो पार होगा

हमारे नाम का सिंदूर ही यह
प्रखर उस माँग का शृंगार होगा

Mahendra Singh Prakhar

महेन्द्र सिंह प्रखर 

( बाराबंकी )

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