हमसे शिक़ायत कैसी

हमसे शिक़ायत कैसी

हमसे शिक़ायत कैसी

जुर्म की जब हो हुकूमत तो वकालत कैसी
पूछते लोग हैं फिर हमसे शिक़ायत कैसी

दुनिया वाले जो करें प्रेम तो अच्छा लेकिन
जब करें हम तो कहे लोग मुहब्बत कैसी

दिल बदलते हैं यहां लोग लिबासों की तरह
हमने बदला है अगर दिल तो क़यामत कैसी

लोग यूं ही तो नहीं मरते हैं हम पर यारों
ये ख़बर सारे ज़माने को है उल्फ़त कैसी

झूठ से बच तो नहीं सकता कभी तू भी प्रखर
बोलता सच हैं अगर तू तो सियासत कैसी

Mahendra Singh Prakhar

महेन्द्र सिंह प्रखर 

( बाराबंकी )

यह भी पढ़ें:-

Similar Posts

  • कलाम है क्या

    कलाम है क्या ये गोल मोल मुहब्बत भरा कलाम है क्यातमाम उम्र यहीं पर तेरा क़याम है क्या कबूल कैसे मैं कर लूँ बता तेरी शर्तेंबिना ये जाने तुझे लेना मुझसे काम है क्या जो बार बार मुझे हुक्म देता रहता हैसमझ लिया मुझे तूने बता गुलाम है क्या जो हर घड़ी चला आता है…

  • ज़िंदगी बदरंग है | Ghazal Zindagi Badrang Hai

    ज़िंदगी बदरंग है ( Zindagi Badrang Hai )   नफ़रतों से प्यार की अब जंग है हर ख़ुशी से ज़िंदगी बदरंग है अंजुमन में कुछ हुआ ऐसा यहाँ देखके ही रह गया दिल दंग है ख़ाक कर दे दुश्मनों को ए ख़ुदा कर रहा जो मुफलिसों को तंग है अंजुमन में कर रहा वो फ़ासिला…

  • किसी के इ़श्क़ में | Kisi ke Ishq Mein

    किसी के इ़श्क़ में ( Kisi ke Ishq Mein ) बेफ़ैज़ ज़िन्दगानी का अफ़साना बन गया।दिल क्या किसी के इ़श्क़ में दीवाना बन गया। फूलों के मिस्ल खिल गया हर ज़ख़्म का निशां।जो ज़ख़्म उसने दे दिया नज़राना बन गया। वो थे क़रीबे क़ल्ब तो ह़ासिल थे लुत्फ़ सब।जाते ही उनके घर मिरा ग़म ख़ाना…

  • आरज़ू के फूल | Aarzoo ke Phool

    आरज़ू के फूल ( Aarzoo ke Phool ) बिखरे हैं मेरे दिल में तेरी आरज़ू के फूलआकर समेट ले ये तेरी जुस्तजू के फूल।। ख़ुशबू हमारे वस्ल की, फ़ैली है हर जगहहर जा बिछे हुए हैं, यहाँ गुफ़्तुगू के फूल महफूज़ रक्खे दिल में तेरी चाहतें जनाबऔर याद जिसने बख़्शे ग़म-ए-सुर्ख़रू के फूल दिल का…

  • ख़ल्वत-ओ-जल्वत | Khalvat-o-jalvat

    ख़ल्वत-ओ-जल्वत ( Khalvat-o-jalvat ) ख़ल्वत-ओ-जल्वत में यारों फ़र्क ही कितना रहाउसकी यादों का सदा दिल पर लगा पहरा रहा। मुझमें ही था वो मगर किस्मत का लिक्खा देखिएअंजुमन में गैऱ के पहलू में वो बैठा रहा। कुछ कमी अर्ज़ -ए – हुनर में भी हमारी रह गईवो नहीं समझा था दिल की बात बस सुनता…

  • वो निशानी दे गया | Wo Nishani de Gaya

    वो निशानी दे गया ( Wo Nishani de Gaya ) ज़र्द चेहरा वो निशानी दे गयाबे सबब सी ज़िन्दगानी दे गया उम्र भर जिसको समझ पाए न हमइतनी मुश्किल वो कहानी दे गया खूँ चका मंज़र था हर इक सू मगरकोई लम्हा शादमानी दे गया जाते जाते वो हमें यादों के साथखुश्बुएं भी जाफ़रानी दे…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *