Bhavna

भावना | Bhavna

भावना

( Bhavna ) 

 

भावनाएं ही मूल हैं
जीवन की सार्थकता मे
आपसी संबंधों का जुड़ाव
लगाव,प्रेम,द्वेष ,ईर्ष्या,नफरत
सभिक्रियाओं का उधमस्थल
भावनाएं ही तो हैं ….

भावना की मधुरता मे जहां
रिश्ते फलते फूलते और
पल्लवित होते हैं, वहीं
मारी हुई भावनाएं
इंसान को दानावपन की और
अग्रसित करती हैं…..

भावनाएं बंधन भी हैं
और महाभारत की जन्मदात्री भी
हृदय मे इनका अपना
एक अलग ही संसार बसता है
जहां ,दवानल भी है और गंगा की शीतलता भी
सूर्य सा प्रकाश भी है
और अमावस की रात भी…

मनुष्य ही नही पशु पक्षी भी
अछूते नही इस भावना की प्रमुखता से
यही दर्शाती भी है आपके मिले
संस्कार ,परिवेश ,व्यवहार आदि को भी
और इसी से आपके व्यक्तित्व की
पहचान भी होती है…

 

मोहन तिवारी

 ( मुंबई )

यह भी पढ़ें :-

समझदार कौन | Samajhdar Kaun

Similar Posts

  • दुस्साहस | Kavita dussahas

    दुस्साहस ! ( Dussahas ) *** भय से भी भयभीत नहीं हो रहे हैं हम, लाख चेतावनियों के बाद भी- कान में तेल डाल, सो रहे हैं हम। दिन प्रतिदिन बढ़ता जा रहा आंकड़ा- दानव रूपी कोरोना का, हम ताली थाली पीट रहे- सहारा ले रहे जादू टोना का ! सरकार जुटी है सरकार बनाने…

  • हे! माॅं | Kavita Hey Maa

    हे! माॅं ( Hey Maa )   हे मां आ जा तू फिर से तेरे आंचल में छिप जाऊं , मैं बैठ गोंद में तेरे फिर देख तुझे मैं पांऊ। तू लिए वेदना असीमित पाली भी मुझको कैसे? तेरी त्याग तपस्या करुणा नैनों से झरते आंसू गिरते तेरे आंचल में मैं भूल जिसे ना पाऊं।…

  • बरखा | Barakha par Kavita

    बरखा ( Barakha )   छम-छम करती आ पहुंची, फुहार बरखा की। कितनी प्यारी लगती है, झंकार बरखा की।।   हल्की-फुल्की धूप के मंजर थे यहां कल तलक। टपा-टप पङी बूंदे बेशुमार बरखा की।।   पानी का गहना पहने है , खेत, पर्वत, रास्ते। करके श्रृंगार छाई है , बहार बरखा की।।   झींगुर, मोर,…

  • गौतम बुद्ध | Gautam Buddha

    गौतम बुद्ध ( Gautam Buddha )  ( 2 )   वैशाख मास बुद्ध पूर्णिमा, लिया  बुद्ध अवतार। श्रीहरि के नवम् अवतार रूप में, प्रगटे बुद्ध भगवान।। दुख- दर्द, जरा अवस्था,  देखी न जाती थी। अर्थी  देखी जब बालक ने, नाना प्रश्न मन उपजे  थे।। उत्तर समाधान कारक, नहीं मिल पाया बालक को।  झंझावात विचारों के…

  • अनुसरण | Anusaran

    अनुसरण ( Anusaran )   यह जरूरी नहीं कि आप हर किसी के साथ हर काम में साथ-साथ रहे किंतु यह जरूरी है कि मानसिक और भावनाओं में सदैव अपनों के साथ रहें  आर्थिक और व्यक्तिगत संबंध से अधिक  व्यावहारिक सहयोग जरूरी है  व्यस्तता और परेशानी सभी से जुड़ी है फिर भी उम्मीदें अपनों से…

  • दिल की आवाज | Poem dil ki awaz

    दिल की आवाज ( Dil ki awaz )    मेरा दिल मुझे ही बार-बार आवाज दे खुद को तुम खुद के ही उमंग से नवाज ले। कल के कई है आईनें, आज का रख तु मायने। डर से भरी ज़िन्दगी निडर बन के तु निकल तेरे जैसे बदन बहुत । लेकिन अलग अंदाज दे खुद…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *