हो शालू | Bhojpuri kavita ho Shalu
हो शालू!
( Ho Shalu )
झमकावेलू,
आंख देखावेलू
लचकावेलू,
मटकावेलू
धमकावेलू,
महटियावेलू
ना आवेलू,
अंठियावेलू
सुनावेलू,
सतावेलू।

( Ho Shalu )
झमकावेलू,
आंख देखावेलू
लचकावेलू,
मटकावेलू
धमकावेलू,
महटियावेलू
ना आवेलू,
अंठियावेलू
सुनावेलू,
सतावेलू।

आस्था ( Aastha ) भावों के भंवर में बोलो बहकर कहां जाओगे मंदिर सा मन ये मेरा कभी दौड़े चले आओगे आस्था की ज्योत जगाकर दीपक जला लेना भाव भरे शब्द सुमन पूजन थाल सजा लेना विश्वास जब भी उमड़े प्रेम की घट धारा आए आस्था उर में जागे जब दिल कोई…

तब होगी मेरे मन में हरियाली ( Tab hogi mere man mein hariyali ) घर-परिवार रहें सुखी और सम्पन्न, रहें आशीष भगवान का सभी पर। प्रेम महोब्बत से रहें हम सारे लोग, कलह कलेश कोई रहें न धरा पर। तब होगी मैरे मन में हरियाली।। बीज-बुवाई सभी खेतों में हो जाएं, बारिश होकर फ़सल…

कला संस्कृति ( Kala Sanskriti ) मेरे तेरे होने का कोई प्रणाम चाहिए। कला और संस्कृति का कोई आधार चाहिए। बिना आधार के क्या बचा पाएंगे संस्कृति को। जो हमारे पूर्वजो की बहुत बड़ी धरोहर है।। कला का संस्कृति पर बड़ा उपकार होता है। संस्कृति के चलते ही कला उदय होता है। दोनों के मिलन…

देखिए प्रभाव हिन्दी का ( Prabhav Hindi Ka ) सोते हिन्दी जागते हिन्दी उठते हिन्दी बैठते हिन्दी लिखते हिन्दी पढ़ते हिन्दी देखिए प्रभाव हिन्दी का। हिंदुस्तान में हिन्दी पाकिस्तान में हिन्दी अफगानिस्तान में हिन्दी देखिए प्रभाव हिन्दी का। फ्रांस, जर्मनी में हिन्दी इटली, ईरान में हिन्दी अमेरिका,जापान में हिंदी देखिए प्रभाव हिन्दी का। मॉरीशस, नार्वे…

कभी कभी ( Kabhi kabhi ) कभी कभी ही होता है दिल बेचैन इतना कभी कभी ही उठता है ज्वार सागर मे कभी कभी ही होती है बारिश मूसलाधार कभी कभी ही आते हैं ख्याल इंतजार मे… कभी कभी ही चांद निकला है ओट से कभी कभी ही होता है एहसास गहरा कभी कभी…

राम सुग्रीव मिताई ( Ram Sugriva Mitai ) सीता माता की सुधि लेने चल पड़े राम लक्ष्मण भाई। शबरी के मीठे मीठे बेर खाए चब चख श्री रघुराई। आगे जाकर रघुवर की जब भक्त हनुमान से भेंट हुई। सुग्रीव से जाकर करी मिताई और सभी पहचान हुई। किष्किंधा का राजा बाली सुग्रीव…

