ग़ज़ल

  • गमज़दा दिल | Ghamzada Shayari

    गमज़दा दिल ( Ghamzada dil )    फूल शबनम छोड़ कर कुछ और ही मौज़ू रहे अब सुखन में भी ज़रा मिट्टी की कुछ खुशबू रहे। हो चुकी बातें बहुत महबूब की बाबत यहां ज़िक़्र उनका भी करें जो मुल्क़ का बाज़ू रहे। गमज़दा दिल कर सकूं आज़ाद ग़म की क़ैद से काश मेरे पास…

  • कालिख़ मल जाएँगे | Kalikh mal Jayenge

    कालिख़ मल जाएँगे ( Kalikh mal jayenge )    ये बेहूदे लफ्ज़ अग़र जो खल जाएँगे लोग मुँह पे आकर कालिख़ मल जाएँगे देख ख़िज़ाँ की ज़ानिब मत नाउम्मीदी से रफ़्ता-रफ़्ता गुजर सभी ये पल जाएँगे मत आया कर छत पर यूँ तू रोज़ टहलने चाँद सितारे शम्स नहीं तो जल जाएँगे छोड़ो अब ये…

  • दर्द ए जुदाई | Dard – E – Judai

    दर्द ए जुदाई ( Dard – E – Judai )    दर्द ए जुदाई सहता बहुत हूँ मैं कुछ दिनों से तन्हा बहुत हूँ दुश्मन मेरा क्यों बनता है वो ही मैं प्यार जिससे करता बहुत हूँ उल्फ़त से मुझसे तुम पेश आना मैं नफ़रतों से डरता बहुत हूँ मिलती नहीं है खुशियाँ कहीं भी…

  • ले गया सकूँ | Sukoon Shayari in Hindi

    ले गया सकूँ ( Le gaya sukoon )    न रही उसको अब उल्फ़त है ? ले गया सकूँ सब राहत है चोट लगी ऐसी दग़ा की कल अब उल्फ़त दिल से रुख़सत है गुल न लिया चाहत का उसने टूटी दिल की ही हसरत है उल्फ़त में ऐसा टूटा दिल न यहाँ दिल को…

  • एक ही थाली में मस्त हैं | Ek hi Thaali

    एक ही थाली में मस्त हैं ( Ek hi thaali mein mast hai )    करते जो शहर भर में दूनाली से गश्त हैं। हम हैं कि उनकी आम ख्याली से पस्त हैं।। मवाली इन्हें समझे उन्हें समझे थे मसीहा, सच में कि दोनों एक ही थाली में मस्त हैं। आका हमारे जाम तोड़ते हैं…

  • मुहब्बत तू निभाए रख | Muhabbat tu Nibhaye Rakh

    मुहब्बत तू निभाए रख ( Muhabbat tu nibhaye rakh )    गुलों से घर सजाए रख ? वफ़ा अपनी बनाए रख अंधेरों से लगे है डर चिरागो को जलाए रख ज़रा दीदार करने दे नहीं चेहरे छुपाए रख उदासी छोड़ दिल से तू लबों को तू हंसाए रख बढ़ेगा प्यार दिल में और नज़र मुझसे…

  • शराब | Sharab

    शराब ( Sharab )    शराबियों की महफ़िल सजी हर जगह यारों, एक दूसरे को फायदा बताते हर जगह यारों। भूल कर भी कोई नुक्सान नहीं बताते है, कहते हैं कई बिमारियों को मिटाती है यारों। दवा का भी सम्मिलित काम करती है यह , सीमा में रह कर पीये और पिओ मापकर यारों। ज्यादा…

  • मुहब्बत का गुल | Muhabbat ki Poetry

    मुहब्बत का गुल ( Muhabbat ka gul )    करे तेरा रोज़ ही इंतिज़ार है गीता हुआ दिल तो खूब ही बेक़रार है गीता ख़फ़ा होना छोड़ दे तू मगर ज़रा दिलबर मुहब्बत की ही कर देगी बहार है गीता बना ले तू उम्रभर के लिये अपना मुझको मुहब्बत में तेरी डूबी बेशुमार है गीता…

  • कितने आलोक समाये हैं | Kitne Alok

    कितने आलोक समाये हैं ( kitne alok samay hai)    तुमने जो निशिदिन आँखों में आकर अनुराग बसाये हैं हम रंग बिरंगे फूल सभी उर-उपवन के भर लाये हैं हर एक निशा में भर दूँगा सूरज की अरुणिम लाली को बाँहों में आकर तो देखो कितने आलोक समाये हैं प्रिय साथ तुम्हारा मिलने से हर…

  • मुस्कुराना छोड़ दूं | Muskurana Chhod Doon

    मुस्कुराना छोड़ दूं ( Muskurana chhod doon )    वो ख़फ़ा गर हैं तो क्या मैं मुस्कुराना छोड़ दूं। खौफ़ से उनके मैं क्या नग़मे सुनाना छोड़ दूं। ठीक है सरकार की नज़रे इनायत चाहिए क्या मगर इसके लिए सारा जमाना छोड़ दूं। लाख कोशिश की मगर फिर भी नहीं खुश है कोई क्या करूं…