कविताएँ

  • बुलंद हुंकार | Poem Buland Hunkar

    बुलंद हुंकार ( Buland hunkar )   मझधार में डूबी नैया अब पार होनी चाहिए कवियों की भी संगठित सरकार होनी चाहिए   सत्ता को संभाले कविता लेखनी की धार बन मंचों से गूंज उठे वो बुलंद हूंकार होनी चाहिए   मातृभूमि को शीश चढ़ाते अमर सपूत सरहद पे महासमर में योद्धाओं की ललकार होनी…

  • शकुन्तला | Shakuntala kavita

    शकुन्तला ( Shakuntala kavita )   घटा घनघोर घन घन बरसे,दामिनी तडके है तड तड। धरा की प्यास मिटती, तन मे जगती प्यास है हर पल।   मिले दो नयन नयनो से, मचल कर कामना भडके। लगे आरण्य उपवन सा,अनंग ने छल लिया जैसे।   भींगते वस्त्र यौवन से लिपट कर, रागवृंत दमके। रति सी…

  • अंतिम यात्रा | Kavita antim yatra

    अंतिम यात्रा ( Antim yatra )     जीवन की प्रचंड धूप में मनुज तपता रहा दिन रात नयन कितने स्वप्न देखे कितनी शामें कितने प्रभात   भाग दौड़ भरी जिंदगी में बढ़ता रहा वो निष्काम चलता रहा मुसाफिर सा अटल पथिक अविराम   जीवन सफर में उतार-चढ़ाव सुख-दुख के मेले हंसते-हंसते जीवन बिता आज…

  • शान्तिपर्व | Shanti parva kavita

    शान्तिपर्व ( Shanti Parva )     करबद्ध निवेदन है तुमसे, अधिकार हमारा वापस दो। या तो प्रस्ताव सन्धि कर लो,या युद्ध का अब आवाहृन हो।   हे नेत्रहीन कौरव कुल भूषण, ज्ञान चक्षु पर केन्द्रित हो। या पुत्र मोह का त्याग करो, या भरत वंश का मर्दन हो।   मैं देवकीनंदन श्रीकृष्ण, पाण्डव  कुल …

  • मीठी-मीठी ठण्डक | Kavita

    मीठी-मीठी ठण्डक ( Meethi meethi thandhak )   कांप रहे सब हाथ पांव, मौसम मस्त रजाई का। देसी घी के खाओ लड्डू, मत सोचो भरपाई का।   ठिठुर रहे हैं लोग यहां, बर्फीली ठंडी हवाओं से। धुंध कोहरा ओस आई, अब ठंड बढ़ गई गांवों में   गजक तिल घेवर बिकती, फीणी की भीनी महक।…

  • लक्ष्मण रेखा | Laxman rekha kavita

    लक्ष्मण रेखा ( Laxman rekha ) परिधि कों पार नही करना हे माता,वचन हमें दे दो। कोई भी कारण हो जाए,निरादर इसका मत करना। परिधि को पार नही करना….. ये माया का अरण्य है, जिसमें दानव रचे बसे है। कही भी कुछ भी कर सकते है,ये दानव दुष्ट बडे है। ये छल से रूप मोहिनी…

  • संक्रांति | Sankranti kavita

    संक्रांति ( Sankranti )     उत्तरायण भी कहे सूर्य मकर राशि में पर्व मकर संक्रांति दिवस दान पुण्य का   तिल गुड़ बांट बांट बोले मीठा मीठा बोल पुण्य भरा काज करो शुभ दिवस आज का   पूजा वंदना कर लो तीर्थों का फल मिलता आशीष मात-पिता का वरदान उन्नति का   पावन गंगा…

  • बेटा | Beta kavita

    बेटा ( Beta )     बुढ़ापे की लाठी बेटा नयनो का तारा बेटा मां बाप का अरमान राज दुलारा है बेटा   नाम रोशन जहां में करता प्यारा दुलारा शुभ कर्मों से घर की आन बान शान बेटा   यश कीर्ति लहराए पुत्र जन्म जब पाये दुनिया में रोशन हो घर का चिराग बेटा…

  • जज्बात | Jazbaat poetry

    जज्बात ( Jazbaat )   मचलते दिल में कुछ अरमान मेरे, जग रही ही अब। दबा था दिल जो वो प्यास शायद, जग रही ही अब।   तरन्नुम में कहु तो, हाल ए दिल बेचैन है दिलवर, तुम्ही पे मर मिटू हुंकार ये चाहत, जग रही है अब।   ये रातें नाग बनकर डंस रही…

  • लोहड़ी | lohri kavita

    लोहड़ी ( Lohri ) ( 2 )  लोहड़ी सिख व हिंदू का प्रमुख त्यौहार, मनाते हैं, इस त्यौहार पर बेहद खुशी व उत्साह दिखाते हैं। लोहड़ी से फसलों की कटाई शुरू हो जाती है, इसी वजह से फसल कटाई का जश्न मनाते हैं।। यह त्यौहार हमारे लोककथाओं को बतलाता है, पारिवारिक परंपराओं से इसका गहरा…