कविताएँ

  • जगजननी जानकी | Kavita Jag Janani Janaki

    जगजननी जानकी ( Jag Janani Janaki )   अपने चरित्र और चिंतन से नारी जीवन के दर्शन दिखलाइए, विपदाओं से घिरी जानकी ने कुल की मर्यादा को बतलाया ।। जिस धोबी ने स्त्री को करके कलंकित घर से निकाला था, माता की हर भाव को पीड़ा में देख वह भी बहुत पछताया था।। समझ लेता…

  • वृद्ध मां बाप | Kavita Vridh Maa Baap

    वृद्ध मां बाप ( Vridh maa baap )   वृद्धाश्रमों में जब किसी के मां बाप रोते और बिलखते हैं, उस पुत्र के लिए बददुआ के लाखों बिजलियां कड़कते हैं। पैदा करने से जवानी तक जो हमें खून पिलाकर पालते हैं, क्यों वृद्ध हो जाने पर वो ही वृद्धाश्रमों में भेजे जाते हैं। क्या यही…

  • सीता नवमी | Kavita Sita Navami

    सीता नवमी ( Sita Navami )   जनक नंदिनी वैभव,राम सत्ता आधार जनक दुलारी महिमा अद्भुत, प्रातः वंदनीय शुभकारी । राम रमाकर रोम रोम, पतिव्रता दिव्य अवतारी । शीर्ष आस्था सनातन धर्म, सुरभि संस्कृति परंपरा संस्कार । जनक नंदिनी वैभव,राम सत्ता आधार ।। मृदु विमल अर्धांगिनी छवि, प्रति पल रूप परछाया । प्रासाद सह वनवास…

  • बिन मानवता | Kavita Bin Manavta

    बिन मानवता ( Bin Manavta )   मैं घंटा शंख बजाऊं,या मंदिर मस्जिद जाऊं। बिन मानवता के एक पल भी,मानव न कहलाऊं।। पहले हवन बाद में दहन,क्यों दुर्गति करवाऊं।। सीधा सादा जीवन अपना,मानव ही कहलाऊं।। दिन में रोजा रात में सो जा,मुर्गी मुर्गा खाऊं। अपनों की परवाह नहीं,दूजा घर भात पकाऊं।। जाति धर्म और भाई…

  • बनारस | Kavita Banaras

    बनारस ( Banaras )   कण कण में हैं शंकर जिसके , और मिट्टी है पारस ! तीन लोक से न्यारी नगरी , जिसका नाम बनारस !! आबोहवा यहां का अनुपम, फिजा में बसती मस्ती ! मोक्ष धाम है महादेव का , मानवता की बस्ती !! स्नेह समन्वय सदाचार संग, बहती ज्ञान की गंगा! सुख…

  • परिवार सब टूट रहे हैं

    परिवार सब टूट रहे हैं संस्कार छूट रहे हैं कुटुंब परिवार सब टूट रहे हैं। संदेह के घेरे फूट रहे हैं अपने हमसे रूठ रहे हैं। घर-घर दांव पेंच चालों का दंगल दिखाई देता है। कलही कारखाना घर में अमंगल दिखाई देता है। संस्कारों की पतवार जब भी हाथों से छूट जाती है। परिवार की…

  • पिता का अस्तित्व | Kavita Pita ka Astitva

    पिता का अस्तित्व ( Pita ka Astitva )   पिता पी ता है गम जिंदगी के होती है तब तैयार कोई जिंदगी गलकर पी जाता है स्वप्न पिता बह जाती है स्वेद मे हि जिंदगी औलाद हि बन जाते उम्मीद सारे औलाद पर हि सजते है स्वप्न सारे औलाद मे हि देता है दिखाई जहाँ…

  • सागर पांव पखारे | Kavita Sagar Paon Pakhare

    सागर पांव पखारे ( Sagar Paon Pakhare )   मस्तक पर है मुकुट हिमालय, सागर पांव पखारे ! गोदी में खेले राम, कृष्ण, अवतार लिए बहु सारे !! भारत मां का रुप सलोना, देख मगन जग वाले ! धन्य धन्य हे आर्य पुत्र, है अनुपम भाग्य तुम्हारे !! निर्झर झरने, मीठी नदियां, शस्य श्यामला धरती…

  • नारी स्वरूप | Kavita Nari Swaroop

    नारी स्वरूप ( Nari Swaroop )   नारी तू एक मगर रूप अनेक। नारी तुम्हारी हाथों में , घर बाहर दोनों सुसज्जित । मां काली सदृश नारी शक्तिशाली , महालक्ष्मी घर की बजट करती पेश । ऐसी प्रबल नारी को प्रणाम । गरिमय व्यक्तित्व को नमस्कार। नारी शक्ति का तू अभिमान है, जन-जन का तुम…

  • फेसबुक | Facebook par Kavita

    फेसबुक ( Facebook ) फेसबुक ,सामाजिक संवाद का अवतार वर्तमान समय प्रौद्योगिकी, मनुज जीवन अभिन्न अंग । भौगोलिक सीमाएं विलोपित, वसुधैव कुटुंबकम् मंत्र संग । मार्क जुकरबर्ग परम योगदान, श्री गणेश बेला दो हजार चार । फेसबुक, सामाजिक संवाद का अवतार ।। अभिव्यक्ति प्रस्तुति अनंत अवसर, लेख कहानी कविता माध्य । वीडियो रील अनूप युक्ति,…