Category: शेरो-शायरी

  • तुम जरा ठहरो | Tum zara thehro

    तुम जरा ठहरो ( Tum zara thehro )     तुम  जरा  ठहरो  मुझे  कुछ, और  बाते  करनी  है। दरमियान  जो  फासलें है, उसको मुझको भरनी है।   एक बार बस सुन तो लो तुम,मुझको जो कहना है वो, खत्म  होती  सी  कहानी, मुझको फिर से लिखनी है।   किसकी गलती थी यहाँ और,किसकी रस्म…

  • गुलशन में कली जवां हुई है | Ghazal

    गुलशन में कली जवां हुई है ( Gulshan mein kali jawan hui hai )     गुलशन में कली जवां हुई है ख़ुशबू अब रवां यहां हुआ है   सबके कल मकां बहे यहां तो बरसात  बहुत  यहां  हुई  है   दूँ फ़ूल  तुझे कहां से लाकर फ़ूलों की सभी ख़िज़ां हुई है   नफ़रत…

  • दिल दुखा ख़ूब रहा वो मेरा | Sad wali ghazal

    दिल दुखा ख़ूब रहा वो मेरा ( Dil dukha khoob raha wo mera )     दिल दुखा ख़ूब रहा वो मेरा ! दोस्त सच्चा न हुआ वो मेरा   हर घड़ी करके सितम वो मुझ पर दिल रहा रोज़ दुखा वो मेरा   रास्ता कैसे मिले मंज़िल का रहनुमा  ही न  बना वो मेरा…

  • शहर से ए यार लौटा गांव में | Ghazal

    शहर से ए यार लौटा गांव में ( Shahar se e yaar lauta gaon mein )     शहर से  ए यार लौटा गांव में देखो अपने चैन मिलता गांव में   छोड़ दी गलियां नगर की इसलिए रिश्ता नाता गहरा अपना गांव में   सोचता हूँ मैं मिलूँ उससे चलो एक अपना दोस्त रहता…

  • आ रही है रोज यादें खूब है | Yaad aap ki shayari

    आ रही है रोज यादें खूब है ( Aa rahi hai roj yaadein khoob hai ) आ रही है रोज़ यादें ख़ूब है ! रोज़ भीगी यार आँखें ख़ूब है   घर नहीं आया वो वादा करके भी देखी उसकी रोज़ राहें ख़ूब है   भूलकर नाराज़गी दिल से सभी फ़ोन पर उसनें की बातें…

  • मेरा सुकुं | Gustakh poetry

    मेरा सुकुं ( Mera sukoon )     मेरा  सुकुं  ओ  नींद  भी  मेरी उड़ाई है जबसे जवानी , टूट के जो तुझपे आई है   शोला बदन को देख के , गुलशन हुआ हैरां बूटे  भी  खिले  ,  आग ये कैसी लगाई है   यूं ही नहीं , गुलाब हुआ सुर्ख रू जालिम आरिज…

  • एक ऐसी मोहब्बत | Ek aisi mohabbat | Poem in Hindi

    एक ऐसी मोहब्बत ( Ek aisi mohabbat )     एक ऐसी मोहब्बत किये जा रहे है, अकेले ही हर ग़म सहे जा रहे है।   नही कोई शिकवा नही है शिकायत, हम अपने दरद को सहे जा रहे है।   नही कुछ कहेगे तेरा नाम लेकर, वफा या ज़फा ये हमारा करम है।  …

  • इसलिए फ़ूल भेजा नहीं प्यार का | Ghazal

    इसलिए फ़ूल भेजा नहीं प्यार का! ( Isliye phool bheja nahi pyar ka )     इसलिए फ़ूल भेजा नहीं प्यार का! है फ़रेबी भरा ख़ूब दिल  यार का   इसलिए ख़त लिख पाया नहीं हूँ उसे बेवफ़ा दिल है उस यार दिलदार का   रिश्ता रखना है तो रख वरना तोड़ दें यूं नहीं…

  • कुछ रात ठहरी सी | Shero shayari

    कुछ रात ठहरी सी ( Kuch raat gehri si )   कुछ रात ठहरी सी है , स्याह सी, गहरी सी है धुंध को ओढ़े सी है , कई राज समेटे सी है   सर्द सी , जर्द सी , सीने में अलाव लिए हुए कांपती, कंपाती सी , दिल को हाथ में थामे सी…

  • गुलशन में ही शबनम ए दौर नहीं है | Gulshan shayari

    गुलशन में ही शबनम ए दौर नहीं है ( Gulshan mein hi shabnam e daur nahin hai )     गुलशन में  ही शबनम ए  दौर नहीं है शाखों पर ही फूल खिला और नहीं है   महंगाई में  दाल ख़रीदे क्या आटा आया अच्छा ही यारों दौर नहीं है   छोड़ फ़कीर है मांगे …