Category: शेरो-शायरी
आशिकी मे मेरा नाम आने तो दो | Aashiqui shayari
आशिकी मे मेरा नाम आने तो दो ( Aashiqui mein mera naam aane to do ) एक से एक मिल चार हो जाएगी, तुम मिला कर तो देखों नयन से नयन। दो से दो मिल के लाएगी ऐसी लहर, बात सारे शहर में बिखर जाएगी। खुशबूओं का चलन इत्र सा अब नही,…
एक मासूम को ही सज़ा मिल गयी | Saza shayari
एक मासूम को ही सज़ा मिल गयी! ( Ek masoom ko hi saza mil gayi ) एक मासूम को ही सज़ा मिल गयी! जीस्त भर आंसुओं की दवा मिल गयी भूख कैसे मिटेगी ग़रीब की भला यार महंगाई की जब जफ़ा मिल गयी दे गये है दग़ा पैसों के लालच में…
हाँ कभी भी न देना दग़ा तू मुझे | Daga shayari
हाँ कभी भी न देना दग़ा तू मुझे ( Haan kabhi bhi na dena daga tu mujhe ) हाँ कभी भी न देना दग़ा तू मुझे प्यार करना वफ़ा से सदा तू मुझे जीस्त से दूर हो ग़म सभी उम्रभर आज ऐसी कोई दे दुआ तू मुझे प्यार का ही चढ़ा है…
आज ऐसी उड़ान करते है | Ghazal Aisi Udaan
आज ऐसी उड़ान करते है ( Aaj aisi udaan karte hai ) आज ऐसी उड़ान करते है वो जहाँ में उफान करते है तब मिले है अनाज ओ रोठी जब खेती ये किसान करते है जीस्त में वो न ख़ुश कभी रहते जो बड़ो से ज़बान करते है जिंदगी भर…
किसी की यादों का | Yaad romantic poetry
किसी की यादों का ( Kisi ki yaadon ka ) इस बारगी बहुत कड़क रहे हो, बरस रहे हो ऐ मौसम, किस बात पर यूं अकड़ रहे हो सड़क किनारे जल रहा कोई अलाव बुझा किसी की दीवार ओ’बाम क्यो हिला रहे हो दिलों पर पहले ही जम रही थी बर्फ…
झूठ घरों पर काबिज़ था | Jhooth Shayari
झूठ घरों पर काबिज़ था ( Jhooth gharon par kaabij tha ) झूठ घरों पर काबिज़ था करना यूँ नाजाइज़ था साथ न दे वो मुश्किल में रब अपना तो हाफ़िज़ था झूठ फ़रेबी था दिल से समझा जिसको वाइज़ था चाहे वो जो काम ग़लत मंजूर न वो हरगिज़…
लबों पर रोज़ ये चर्चा रहा है | Ghazal
लबों पर रोज़ ये चर्चा रहा है ( Labon par roz ye charcha raha hai ) लबों पर रोज़ ये चर्चा रहा है उसी से अब नहीं रिश्ता रहा है नहीं वो पास में ये ही सही अब ग़ज़ल मैं याद में सुनता रहा है मिली है कब वफ़ा सच्ची किसी…
बेवफ़ा | Bewafai par shayari
बेवफ़ा ( Bewafa ) नहीं राहें वो वफ़ा से भरी बेवफ़ा है मुहब्बत की राहें यारों सभी बेवफ़ा है ग़मो की आहें निकलती यहाँ तो दिल से हुई मेरी जिंदगी से ख़ुशी बेवफ़ा है वफ़ा नहीं देगा इजहार मत करना उससे उसकी सांसों से महक आ रही बेवफ़ा है की…
अकड़ अमीरी का | Poem on akad ameeri ka
अकड़ अमीरी का ( Akad ameeri ka ) दिखाता है अकड़ वो ख़ूब ही मुझको अमीरी की! वही उडाता मजाक मेरी बहुत यारों ग़रीबी की मगर फ़िर भी नहीं तक़दीर बदली बदनसीबी से इबादत की बहुत ही रोज़ मैंनें तो इलाही की ख़ुशी के पल नहीं है जिंदगी में ही भरे…
ग़म यार हजार ज़ीस्त में है | Gam ghazal
ग़म यार हजार ज़ीस्त में है ( Gam yaar hajaar zeest mein hai ) ग़म यार हजार जीस्त में है इक पल न क़रार जीस्त में है रूठी है यहां प्यार की खुशबू कोई न बहार जीस्त में है कटती जीस्त जा रही है तन्हा कोई नहीं यार जीस्त में है …