दिल चुराने का ये अंदाज न हो
दिल चुराने का ये अंदाज न हो

दिल चुराने का ये अंदाज न हो।

 

दिल चुराने का ये अंदाज न हो।
क्या मजा है जो कोई राज न हो।।

टूट जाउंगा बिखर जाऊंगा,
जिंदगी इस कदर नाराज़ न हो।

बहुत दिनों कहने से डर जाता हूं,
छू लूं तुमको अगर ऐतराज न हो।

वो भी दुनिया नसीब कब होगी,
बात होती रहे अल्फाज न हो।

इश्क है नाम उसी का शायद,
अश्क गिरते रहें आवाज न हो।

चौंक कर रात में उठ जाता हूं,
फिर नये जख्म का आगाज न हो।

शेष मुमकिन नहीं जमाने में,
मेरा सुर हो तुम्हारी साज न हो।‌।

 

🍀

लेखक: शेष मणि शर्मा “इलाहाबादी”
प्रा०वि०-बहेरा वि खं-महोली,
जनपद सीतापुर ( उत्तर प्रदेश।)

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