
Similar Posts

प्रेमसिंह सोलंकी जी
ByAdminप्रेमसिंह सोलंकी जी ( स्वतंत्रता संग्राम सेनानी व पूर्व विधायक ) हमारे आदर्श आदरणीय श्री प्रेमसिंह सोलंकी जी,जनता के बीच में जन _जन के नायक थे।समाज सेवी और स्वतंत्रता संग्राम सेनानी,राजनीति के धुरंधर विधायक थे।। तारीख 15 जुलाई सन 1913 को स्थानपटेल फलिया, समोई, मध्यप्रदेश मेंपिता श्री बापुजी सोलंकी.जीबालक बन कर जन्म लिए घर परिवार…

पिता की स्नेहाशीष पाती | Papa par kavita
ByAdminपिता की स्नेहाशीष पाती ( श्रृद्धांजलि ) एक स्नेहाशीष चिट्ठी को तरसता मेरा मन आज बरबस दिवंगत पिता को याद करता है दस बरस पहले अनायास जो चले गए थे तुम आज भी आप की चिट्ठी की राह तकती हूँ कईं पत्रों को भेजकर कुशल पूछा करते थे अक्सर बेटी को नेह देने का तरीका…

कुपित हो रही है यह प्रकृति | Paryavaran par Kavita in Hindi
ByAdminकुपित हो रही है यह प्रकृति ( Kupit ho rahi hai yah prakriti ) आत्महंता कर्म हम कर रहे हैं, कुपित हो रही है यह प्रकृति जीव–जंतु सभी यहां मर रहे हैं है ये पर्यावरण की ही व्यथा कि, हो रहा जो पर्यावरण दूषित यहां आज सभी पक्षी भी हमारे लुप्त होते ! भोजन…

अद्भुत है रुद्राक्ष | Rudraksh
ByAdminअद्भुत है रुद्राक्ष ( Adbhut hai rudraksh ) भगवान शंकर के अश्रुओं से हुई जिसकी उत्पति, असरदार और अद्भुत लाभ अचूक जिनमें शक्ति। हिंदूधर्म में पूज्य और पवित्र जिसको माना जाता, कलाई कंठ हृदय पर धारण करके करते भक्ति।। पौराणिक मान्यता से जिसे रूद्र-अक्ष कहा जाता, जो एक मुखी से चौदह मुखी का रुद्राक्ष है…

यह गोल-गप्पे | Gol-gappe
ByAdminयह गोल-गप्पे ( Yah gol-gappe ) गोलगप्पे का नाम सुनकर ये मुॅंह में पानी आ जाता, चाहें राजा हो या रंक मन की कलियां खिल जाता। गली-मौहल्ले चौराहों पर ये आसानी से मिल जाता, अगर घर में कोई लाए तो पटरानी ख़ुश हो जाता।। आटा और मैदा से इसके लिए पूरियां बनाया जाता,…

गुरु कृपा | Guru Kripa
ByAdminगुरु कृपा ( Guru Kripa ) शब्द ही शब्द की परिभाषा थी शब्द थे उसके नेत्र शब्द का ज्ञान था उसमें शब्द ही उसके भेद दिया था यह शब्द ज्ञान जिसने वह गुरु कृपा ही थे ईश्वर कृपा से पहले उनकी कृपा थी उस गुरु कृपा बिन कैसे तर पाएंगे गुरु ज्ञान बिना ही…

