जल ही जीवन

Jal par kavita | जल ही जीवन

जल ही जीवन

( Jal Hi Jeevan Hai )

 

बूॅ॑द -बूॅ॑द  से  घड़ा  भरे, कहें  पूर्वज  लोग,
पानी को न व्यर्थ करें, काहे न समझे लोग।

 

जल जीवन का आधार है,बात लो इतनी मान।
एक  चौथाई  जल  शरीर,  तभी थमी है जान।

 

जल का दुरुपयोग कर, क्यों करते नुकसान।
जल  से  है  सृष्टि  सारी, जल  से  हैं  ये प्राण।

 

जलाशय  सब  स्वच्छ  रहें,  इतना  करें  प्रण,
तब   होगी   जल   सुरक्षा, बचा  रहेगा  जल।

 

जलस्रोतों  का  मान  करें,  करें सही उपयोग,
जीव निर्जीव का प्राण जल,मानो इसे सब लोग।

कवयित्री: दीपिका दीप रुखमांगद
जिला बैतूल
( मध्यप्रदेश )

यह भी पढ़ें : 

कर दो इतना करम ऐ हसीं वादियों | Haseen Waadiyon par Shayari

Similar Posts

  • समय के साथ साहित्य समाज बदलता है | Sahitya Samaj par Kavita

    समय के साथ साहित्य समाज बदलता है ( Samay ke sath sahitya samaj badalta hai )    वक्त के साथ बदल जाती है सब की जीवनधारा। समय के साथ साहित्य बदले संग समाज हमारा। बदल रहे हैं तौर-तरीके बदला अपनापन प्यारा। बदल रही शिक्षा नीति सभ्यता संस्कार हमारा। बदल रही सब बयार बसंती स्नेह सुधा…

  • कला संस्कृति | Kavita Kala Sanskriti

    कला संस्कृति ( Kala Sanskriti ) मेरे तेरे होने का कोई प्रणाम चाहिए। कला और संस्कृति का कोई आधार चाहिए। बिना आधार के क्या बचा पाएंगे संस्कृति को। जो हमारे पूर्वजो की बहुत बड़ी धरोहर है।। कला का संस्कृति पर बड़ा उपकार होता है। संस्कृति के चलते ही कला उदय होता है। दोनों के मिलन…

  • मन का सावन | छंदमुक्त गीत

    मन का सावन ( Man ka Sawan ) कोकिला, पपीहा के मधुर बोल, बारिश की रिमझिम, हरियाली चहुँओर। साजन की याद सताये, रह-रहकर, आया सावन माह देखों झूमकर–2 झूले पड़ गये, डाली-डाली बम-बम बोले, हर गली-गली–2 कजरी की धुन,लगे मनभावन–2 बहुत सताता है ये, मन का सावन –2 मादकता में ,अवगाहन धरती, वर्षा का रस…

  • मैं क़लम हूं

    मैं क़लम हूं स्वेत रुप है मेरी कायाभेद छल से दूर हूं मैंनिश्छल है मेरी कायाइतिहास लिखा नन्हे कदमों सेभविष्य भी हूं मैं तुम्हाराहां मैं क़लम हूं बच्चों का दोस्त हूं मैंदिलाता हूं उन्हें सफलता प्याराजो बिगड़ें बोल बोले कोईतो कालदण्ड हूं मैं तुम्हाराहां मैं क़लम हूंहां मैं कलमकार हूं नवीन मद्धेशिया गोरखपुर, ( उत्तर…

  • अंगदान है महादान | Angdaan hai Mahadaan

    अंगदान है महादान ( Angdaan hai mahadaan )   चलों साथियों दिलदार बनों और करों अंगों का दान, महादान का हिस्सा बनकर बन जाओ सभी महान। समझो इसकी अहमियत करों प्रोत्साहित हर इंसान, यह अमूल्य-उपहार है जो बचाता मरीज़ की जान।। जीवित चाहें मृत व्यक्ति जिसका कर सकता है दान, पहले नेत्रदान एवं रक्तदान था…

  • मन तू क्यूं ना माने ?

    मन तू क्यूं ना माने ? मन तू ,क्यूं ना माने ?सबको क्यूं , अपना माने । सब होते ना ,यहां अपने ।कुछ होते, हैं बेगाने । बनते हैं, बहुत ही अपने ।दिखाते, नित नए सपने । फिर एक दिन, रंग दिखाते ।उनके नकाब, गिर जाते । वो प्रेम ,कहीं खो जाता ।ढूंढ़े से,नज़र ना…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *