घूंघट न होता तो कुछ भी न होता

छंद घूंघट | मनहरण घनाक्षरी

छंद घूंघट

मान मर्यादा रक्षक, लाज शर्म धर ध्यान।
चार चांद सौंदर्य में, घूंघट सजाइए।

प्रीत की फुहार प्यारी, सुंदर सुशील नारी।
पिया मन को लुभाती, घूंघट लगाइए।

गौरी का श्रृंगार सौम्य, प्रियतम मन भाए।
गोरा मुखड़ा चमके, घूंघट दिखाइए।

पहने परिधान वो, घर की पहचान वो।
भारत की शान नारी, घूंघट हटाइए।

कवि : रमाकांत सोनी

नवलगढ़ जिला झुंझुनू

( राजस्थान )

यह भी पढ़ें :

दुनिया के मेले में हर शख्स अकेला | Kavita Duniya ka Mela

Similar Posts

  • आइए प्रभु आइए | Chhand

    आइए प्रभु आइए ( Aaiye Prabhu Aaiye ) मनहरण घनाक्षरी छंद   लबों की हो मुस्कान भी पूजा और अजान भी अंतर्यामी प्रभु मेरे दौड़े-दौड़े आइए   जग पालक स्वामी हो हृदय अंतर्यामी हो हाल सारा जानते देर ना लगाइये   पलके अब खोल दो सबको आ संबल दो पीर भरे मेंघ छाये विपदा निवारिये…

  • कोहरा | Kohara par Chhand

    कोहरा ( Kohara  )    मनहरण घनाक्षरी   ठंडी ठंडी हवा चली, शीतलहर सी आई। ओस पड़ रही धुंध सी, देखो छाया कोहरा। ठिठुरते हाथ पांव, बर्फीली हवाएं चली। कुदरत का नजारा, कांप रही है धरा। धुआं धुआं सा छा रहा, धुंधली दिखती राहें। कोहरा की भरमार, संभल चले जरा। पड़ रही ओस बूंदे, पत्तों…

  • पुराने खत | Purane khat | Chhand

    पुराने खत ( Purane khat )   मनहरण घनाक्षरी   पुरानी यादें समेटे, पुराने खत वो प्यारे। याद बहुत आते हैं, पल हमें भावन।   शब्द बयां कर जाते, मन के मृदुल भाव। मोती बन दमकते, लगे मनभावन।   खत पुराने मुझको, याद फिर दिला गए। भावन जमाना था वो, मौसम भी भावन।   सहेज…

  • कर्म ही पूजा है | Chhand karm hi pooja hai

    कर्म ही पूजा है ( Karm hi pooja hai ) मनहरण घनाक्षरी   कर्म श्रद्धा कर्म भक्ति कर्म धर्म पुनीत है कर्म ही पूजा हरि की कर्म नित्य कीजिए   कर्म योग कर्म ज्ञान कर्म पथ पावन है कर्म कर जीवन की नौका पार कीजिए   कर्म सेवा हरि आस्था कर्मशील पुरुषार्थी कर्म से मंजिलें…

  • सतरंगी फाग | Chhand Satrangi Fag

    सतरंगी फाग ( Satrangi fag )    इंद्रधनुषी रंगों का, सतरंगी फाग छाया। बसंत बहारें चली, मस्त लहर लहर। प्रियतम भीगा सारा, सजनी भी भीग गई। रंगीला फागुन आया, बरसा पहर पहर। गाल गुलाबी महके, रंग गुलाल लगाके। फाग गाते नर नारी, गांव शहर शहर। झूमके नाचे रसिया, सुरीली धमाल बाजे। बांसुरी की तान छेड़े,…

  • शालीनता | देव घनाक्षरी | Chhand Shalinta

    शालीनता ( Shalinta )   शालीनता सुशीलता सौम्य स्वभाव बनाए संस्कार हमारे शुभ हो कीर्ति पताका गगन   विनय धीरज धर भाव विमल धार लो उर आनंद बरसे हरसे मन का चमन   बहती पावन गंगा प्रेम सिंधु ले हिलोरे सत्कार मिले सबको, कर जोड़ करें नमन   सुंदर सी सोच रख विनम्र हो भाव…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *