हम भारत के लोग

Kavita | हम भारत के लोग

हम भारत के लोग

( Ham Bharat Ke Log )

******

हम भारत के लोग हैं
सीधे सच्चे सादे
इसी का फायदा अक्सर
विदेशी मूल के लोग हैं उठाते
चंगुल में फंसकर हम उनके
सदियों से हैं हानि उठाते।
डराते धमकाते बहकाते हमें है
आपस में हैं लड़ाते
यही खेला खेलकर
संसाधनों पर हमारी कब्जा जमाते,
जब तक हम समझ पाते तब तक
मलाई डकार जाते।
शासन प्रशासन में हैं वही सब कब्जा जमाए,
हमारे हक की खा-खाकर अतिशय हैं वे मोटाए।
हमारी अशिक्षा गरीबी का वो फायदा हैं खूब उठाए,
बाबा साहब ने यह देखकर
हम भारतीयों ( मूलनिवासियों) को समझाए;
कैसे उन्नति प्रगति करनी है?
मार्ग दिए बतलाए,
यहां तक कि संविधान में कई-
प्रावधान हैं कर गए।
तब जाकर हम जगे हैं कुछ कुछ,
पढ़ लिखकर हम बढ़े हैं कुछ कुछ।
दृष्टिकोण में लाए हैं बदलाव,
शिक्षित संगठित होकर अब चल रहे सधे हुए हम दांव।
अन्याय के विरुद्ध स्वर उठा रहे,
सड़क से संसद तक आवाज पहुंचा रहे।
संवैधानिक प्रावधानों की सीमा में रहकर,
उठ खड़े हुए हैं डटकर।
कुछ मिली है कामयाबी,
अभी भी बहुत कुछ है बाकी।
जाग जाओ भारत के लोगों अब भी समय है,
वरना अब तो हमारी दुर्गति तय है।

?

नवाब मंजूर

लेखक-मो.मंजूर आलम उर्फ नवाब मंजूर

सलेमपुर, छपरा, बिहार ।

यह भी पढ़ें : – 

https://thesahitya.com/bayaj-dar/

Similar Posts

  • अपनी छवि निहार | Poem apni chabi nihar

    अपनी छवि निहार ( Apni chabi nihar )   अपनी छवि निहार , सुध भूद खोई बैठी नयन राह देखे मेरे , सखियों से दूरी होई।। दिनभर चली पवन , पर कम न हुई तपन , पानी से भीगा तन, फिर भी प्यासा ये मन ।। अटखेलियां करती में, तुम बिन नीरस होई, फिर से…

  • रूप चतुर्दशी | नरक चतुर्दशी

    रूप चतुर्दशी/नरक चतुर्दशी ( Naraka Chaturdashi )   दिवाली के एक दिन पहले आती छोटी दिवाली, रूप चतुर्दशी नर्क चतुर्दशी कहते चौदस काली। नरका पूजा के नाम से भी जानते है हम इसको, चौमुखा दीप रोली गुड़ खीर से सजाते है थाली।। इस दिन सायं के समय चारों तरफ़ दीप जलाते, विधि विधान से कृष्ण…

  • परेशानी | Pareshani par Kavita

    परेशानी ( Pareshani )    दिल थाम लो जरा तुम तिरछी धाराओं को मोड़ दो राह की अड़चन बन जाये उन बेड़ियों को तोड़ दो बाधाओं मुश्किलों ने घेरा परेशानियां बुन रही जाल आंधी तूफां आते जाते चलना जरा कदम संभाल घोर निराशाओं के बादल जब आके सर पे मंडराए धीरज धरना मीत मेरे हिम्मत…

  • मौसम की मार | kavita mausam ki maar

    मौसम की मार ( Mausam ki maar )   शीतलहर ढ़ाहत कहर दिखाई न देता डगर है, पग-पग जोखिम भरा मुश्किल हुआ सफ़र है,     सनसन चलती हवा ठंडक से ठिठुरता मानव, कौन किसकी बात सुने सबही हुआ सफ़र है।   कहीं पड़ते बर्फ के फाहे कहीं मूशलाधार वर्षा, चहुँओर से घिरता जीवन जीना…

  • प्राची अमर उजाला है | Prachi Amar Ujala Hai

    प्राची अमर उजाला है ( Prachi Amar Ujala Hai ) संसार प्रकृति के नियमों के अधीन है lऔर परिवर्तन एक नियम है lशरीर तो मात्र एक साधन है lआज इसका है ,तो कल उसका है lओ मेरी भारत की बेटी lक्या सोचा था ? क्या होगया ? तुझे प्रतिभा का दर्पण नहीं ,प्रतिभा की उमँग…

  • सत्कार | Satkar kavita

    सत्कार ( Satkar )   आन मान मर्यादा का सत्कार कीजिए जो बने नींव के प्रस्तर आभार दीजिए   माता-पिता गुरु की सेवा सत्कार कीजिए आशीषो से झोली भर खूब प्यार दीजिए   कोई अतिथि आए आदर सबको भाये बढ़कर  बड़े  प्रेम  से सत्कार कीजिए   दीन हीन रोगी कोई वक्त का मारा हो गले …

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *