Hindi Kavita On Women -नारी
नारी
( Nari Kavita )



माह्णुआं दी पछैण जे करनी माह्णुआं दी पछैणतां न्यारिया वत्ता हंडणा सिख।जे पाणा तें आदर मान सारे यां ते।ता लोकां दा सुख दुःख वंडणा सिख।खरे खोटे मितरे बैरिये दा पता नि चलदा।सुप्पे साही फटाकेयां देई छंडणा सिख। ईह्यां नि जवानी ते जैह्र बुऴकणा।मोका दिक्खी सर्पे साहि डंगणा सिख। रूड़दे माह्णुए जो नि कोई बचांदा।डूब्बी तैरी…

कविता श्रृंखला हमारे शहर में हमारे शहर में बहुत सारे लोग अल्पाहारी हैं साथ ही शुद्ध शाकाहारी हैं. वे लहसुन -प्याज नहीं खाते हैं मगर रिश्वत खाने से बाज़ नहीं आते हैं. तल्ख़! क्या तुमको पता है? रिश्वत सरकारी है रिश्वत सहकारी है रिश्वत तरकारी है रिश्वत खाने वाला ही एकमात्र विशुद्ध शाकाहारी है….. …

वृक्ष हमारे तुम संरक्षक हो वृक्ष हमारे तुम संरक्षक होहरे भरे हो खड़े हो सीना ताने।भव्य शस्यश्यामल है रूप तिसारा,लगते कोई हमारे शुभ चिंतक हो।घने घने हरे भरे पत्तों से सुशोभित,थलचर -नभचर को आश्रय देते-हो।शीतल छांव तुम्हारी देती आश्रय,हर प्राणी हर चर अचर को।सकल ब्रम्हांड में हो जय जयकार तुम्हारी,वृक्ष तुम मित्र हो, है तुम्हारी…

मकानों में रख लिया ( Makano me rakh liya ) था जिन दियो में तेल मकानों में रख लिया । खाली दियो को तुमने मचानों में रख दिया ।। उत्तर थे मेरे पास तुमने छीन सब लिया । फिर मुझको सवालो के निशानों पे रख दिया ।। छीनी किसानों…

क्या शैतान सच में होते हैं क्या सच में,होते हैं शैतान ?या ये है केवल,हमारा अनुमान ।हां वाकई,होते हैं शैतान ।जब हम करते हैं,कोई बुरा काम ।या फ़िर करते हैं,बड़ों का अपमान ।तब हमारे भीतर ही,प्रविष्ट हो जाते हैं ;ये दुष्ट शैतान ।जब हम, भूल जाते हैं ,सही ग़लत की पहचान ।तभी हमें उकसाते हैं…

हिन्दी दिवस मनाएंगे हिन्दी दिवस मनाएंगे,हिन्दी का परचम लहराएंगे।अपने मन की ये अभिलाषा,जन -जन तक पहुँचाएंगे। हिन्दी संस्कारों की भाषा,मन के मनुहारों की भाषा।शिष्टाचार व्यवहार की पूँजी,बसी है रग-रग में मातृभाषा। रसों की रसधार हिन्दी में,वीरों की हुँकार हिन्दी में।सात सुरों की सरगम सी,काव्यों की काव्यधार हिन्दी में। आओ इसको नमन करें हम,कुछ तो नया…