Jazbaat pe Ghazal

जज़्बात से | Jazbaat pe Ghazal

जज़्बात से

( Jazbaat se ) 

 

ज़िंदगी चलती नहीं है आज़कल जज़्बात से
जूझना पड़ता सभी को रात दिन हालात से।

गीत ग़ज़लें और नज़्में भूल जाता आदमी
ज़िंदगी जब रूबरू होती है अख़राजात से।

क्यूं चलाते गोलियां क्यूं लड़ रहे सब इस क़दर
रंजिशों के मामले अक्सर हुए हल बात से।

अब के बारिश झूम के आई है बंगलो में मगर
मुफ़लिसों के घर टपकते बेरहम बरसात से।

बंट रहे घर उठ रही दीवार बीचो बीच में
बेतहाशा रो रही है मां सुना कल रात से।

मुंह पे मीठी बात पीछे जो बुराई कर रहे
बच के रहना चाहिए इस तरह के हज़रात से।

देख कर चादर पसारो पांव तुम अपने नयन
ख़र्च करना चाहिए बढ़कर नहीं औकात से।

 

सीमा पाण्डेय ‘नयन’
देवरिया  ( उत्तर प्रदेश )

यह भी पढ़ें :-

बदलते हैं | Best Ghazal Lines in Hindi

Similar Posts

  • इरादा डिगा नहीं सकता

    इरादा डिगा नहीं सकता हवा का ज़ोर इरादा डिगा नहीं सकताचराग़े-ज़ीस्त हूँ कोई बुझा नहीं सकताहुस्ने-मतला– किसी के सामने सर को झुका नहीं सकतावजूद अपना यक़ीनन मिटा नहीं सकता फ़कत तुम्हारी ही मूरत समाई है दिल मेंइसे मैं चीर के सीना दिखा नहीं सकता किसी के प्यार से जान-ओ-जिगर महकते हैंयक़ीन उसको ही लेकिन दिला…

  • जवानी | Ghazal Jawani

    जवानी ( Jawani ) जब जवानी ने खेल खेले थे हर तरफ फूल थे व मेले थे हम कभी भूल ना सकेंगे की फूल के साथ हम अकेले थे हां, झमेले भी थे मगर यारों वे सुगंधित हसीं झमेले थे काम था नाम था जवानी थी जेब में लाख लाख धेले थे वास्ता सिर्फ था…

  • हक़दार नहीं थे | Ghazal Haqdaar Nahi The

    हक़दार नहीं थे ( Haqdaar Nahi The ) कुछ दोस्त हमारे ही वफ़ादार नहीं थे वरना तो कहीं हार के आसार नहीं थे ख़ुद अपने हक़ों के हमीं हक़दार नहीं थे हम ऐसी सियासत के तलबगार नहीं थे झुकने को किसी बात पे तैयार नहीं थे क्यों हम भी ज़माने से समझदार नहीं थे हर…

  • तेरा शिद्दत से इंतिज़ार किया

    तेरा शिद्दत से इंतिज़ार किया उम्र भर बस ये रोज़गार कियातेरा शिद्दत से इंतिज़ार किया बेसबब ख़ुद को दाग़दार कियाजाने क्यों तेरा ऐतिबार किया ज़ीस्त में अब न लुत्फ़ है कोईक्या कहें घर को ही मज़ार किया क्यों न करते भी शुक्रिया उसकाजिसने मौसम को ख़ुशगवार किया ज़ख़्म खाये हज़ार थे हमनेमरहम-ए-वक़्त ने सुधार किया…

  • चुनावी वादे | लुगाई मिलेगी

    लुगाई मिलेगी ( Lugai Milegi ) चुनावी समर में मलाई मिलेगी, कुंवारे जनों को लुगाई मिलेगी ! करा दी मुनादी नेता जी ने घर घर, बूढ़ों को भी सहरा सजाई मिलेगी ! जिताकर हमे जो दिलाएगा कुर्सी, लगी घर में लाइन सगाई मिलेगी ! दुखी है जो घर में भी बेगम सगी से, पड़ोसन हसीं…

  • रुलाती हमको | Ghazal Rulati Humko

    रुलाती हमको ( Rulati Humko ) खिलातीं रोज़ गुल ये तितलियाँ हैं हुई भँवरों की गुम सब मस्तियाँ हैं हमारे साथ बस वीरानियाँ हैं जिधर देखो उधर तनहाइयाँ हैं ग़ज़ब की झोपडी में चुप्पियाँ हैं किसी मरते की शायद हिचकियाँ हैं रुलाती हमको उजड़ी बस्तियाँ ये कि डूबी बारिशों में कश्तियाँ हैं मुसीबत में नहीं…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *