कहानी मेरी

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कहानी मेरी

( Kahani Meri )

 

 

क्या  कहूँ  तेरे  बिना – क्या है ये जिंदगानी  मेरी;
तुझसे शुरु तुझपे ख़त्म ये छोटी-सी कहानी मेरी ।

 

ना  भूख,  ना प्यास,  दिल घायल,  बेचैन रूह है;
तुझे क्या बताऊँ क्या-क्या नहीं है परेशानी मेरी ।

 

जो  बेशक़ीमती लम्हें हमने तेरे साथ गुज़ारे थे;
सिर्फ़  वही  भूली-बिसरी  यादें हैं  निशानी तेरी ।

 

बेख़बर ज़माने को क्या ख़बर किसका दिल कब टूटा;
जो  जानते  हैं मुझे  उन्हें मालूम है ये कहानी मेरी ।

 

बदनाम  होकर  भी  आज  कुछ  नाम  है ज़माने में;
 इसे  खता  कहे  अपनी  या  कहे  मेहरबानी  तेरी ।

 

खिलौनों से खेलते-खेलते कब जज़्बातों से खेलने लगे;
ना जाने कितनों को ले डूबी ये छोटी-सी नादानी तेरी ।

 

भूल  कर भी अब तेरी राह में हम ‘दीप ना चलाएँगे;
ख़ुश  रह  तूँ,  जा जीभर के जी ले जिंदगानी तेरी ।

 

?

कवि : संदीप कटारिया

(करनाल ,हरियाणा)

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