Kavita Aam ke Aam

आम के आम गुठलियों के दाम | Kavita Aam ke Aam

आम के आम गुठलियों के दाम

( Aam ke Aam guthliyon ke daam )

 

आम के आम हो जाए, गुठलियों के दाम हो जाए।
अंगुली टेड़ी करनी ना पड़े, अपना काम हो जाए।

कविता में रस आ जाए, श्रोताओं के मन भा जाए।
कलमकार रच कुछ ऐसा, दुनिया में नाम हो जाए।

आम वही जो रस टपकाए, मीठा हो मन ललचाए।
मीठे बोल मधुर सुहाने, सब के दिलों में बस जाए।

तेरे अधरों पर मुस्कानें हो, हंसी मेरे चेहरे पर छाए।
मधुर तराने गीत सुहाने, दुनिया दीवानी हो जाए।

शब्दों के अनमोल मोती, बहारों का मौसम आ जाए।
मन मयूरा झूम के नाचे, मस्त पवन समां महाकाए।

याद करे जब भी तुमको, नैनों में झलक आ जाए।
महक उठे दिल की बगिया, मनमीत नजर आ जाए।

कवि : रमाकांत सोनी

नवलगढ़ जिला झुंझुनू

( राजस्थान )

यह भी पढ़ें :

रमाकांत सोनी की कविताएं | Ramakant Soni Hindi Poetry

Similar Posts

  • सात्विक गौरव के है ये पल

    सात्विक गौरव के है ये पल निशांत बच्छावत के 16 वाँ जन्मदिन पर मेरे भाव- पूर्वजों के पुण्य – पुंज और आशिर्वाद के निहितार्थ वात्सल्यमय निशांत के जन्मदिन के शुभ – दिवस पर उसको स्नेहासिक्त जीवन के “प्रदीप “ पाने की शुभकामनाएँ । सात्विक गौरव के है ये पलपुरुषार्थ का मिला जो सुफलव्यक्तित्व द्वय को…

  • महुआ | Mahua par kavita

    महुआ ( Mahua )   औषधीय-गुणों का जिसमें भरा है ख़ज़ाना, वैज्ञानिकों ने भी आज इसी-बात को माना। इसका ‌बीज-छाल हर पत्ता भी है उपयोगी, इसके निकलें हुये तेल से बनातें हम खाना।। बनाई जाती है इससे ढ़ेर तरह की दवाईयाॅं, जिससे ठीक होती है मरीज़ की बिमारियाॅं। एक्जिमा मिर्गी बवासीर में होता है आराम,…

  • धरा | Dhara kavita

     “धरा”  ( Dhara )     “धरा”नहीं, तो क्या”धरा” || धरती-भूमि-धरा-प्रथ्वी-हम सब का अभिमान है | बसते हैं नर-जीव-जन्तु जो, उन सब पर बरदान है | प्रथम गोद माँ की होती है, दूसरी धरती माता की | प्रथम खुरांक माँ के आँचल से, दूजी धरती माँ की | “धरा”नहीं, तो क्या”धरा” || इसी धरा पर…

  • शरद पूर्णिमा का चांद | Sharad Purnima ka Chand

    शरद पूर्णिमा का चांद ( Sharad purnima ka chand )   चारू चंद्र का मनोरम स्वरूप कितना सुंदर कितना प्यारा, इसकी सुंदरता देख रहा है एकटक होकर ये जग सारा। शरद पूर्णिमा का चांद अपनी सोलह कला दिखलाता, मानो अंतरिक्ष के मंच पर सुंदर नृत्य सबको दिखलाता। समूचे ब्रम्हांड में चारों ओर ये चमक चांदनी…

  • पश्चाताप | Poem paschatap

    पश्चाताप ( Paschatap )   पश्चाताप सम्राट अशोक किया, कलिंग युद्ध बाद। भीषण नरसंहार हुआ, उन्नति मूल्य हो गये बर्बाद।   राम को बनवास भेज, दशरथ ने किया परिताप। राम राम रटते मर गए, हुआ पुत्र वियोग संताप।   पछतावा फिर होता जब, चिड़िया चुग जाये खेत। सोना उगले धरती मांँ, मोती निपजे ठंडी बालू…

  • बाल गणेश | Poem Bal Ganesh

    बाल गणेश ( Bal Ganesh ) बाल गणेश ने थाम रखा है मोदक अपने हाथ में, मूषकराज जी रहते है हर पल उनके साथ में, शांत खड़े कोने में देख रहे ललचाई आँखों से सोच रहे मुझे भी मोदक खाने को मिलेगा बाद में! कवि : सुमित मानधना ‘गौरव’ सूरत ( गुजरात ) यह भी…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *