Kavita Aarambh Likhoon ya Ant Likhoon

आरंभ लिखूं या अंत लिखूं | Kavita Aarambh Likhoon ya Ant Likhoon

आरंभ लिखूं या अंत लिखूं

( Aarambh likhoon ya ant likhoon ) 

 

आरंभ लिखूं या अंत लिखूं, मैं लिख दूं मस्त बयार।
प्रेम की पाती मनभावन, या दिलों में उमड़ता प्यार।

जीवन सुहानी भोर लिखूं, मैं लिख दूं वो ढलती शामें।
रिश्तों की नाज़ुक डोर लिखूं, विश्वास दिलों को थामें।

मन की कोई पीर लिखूं, या जीवन के अफसाने।
प्यार भरा कोई गीत लिखूं, या देशभक्त दीवाने।

मौसम के बदलते रंग लिखूं, या फागुन की रसधार।
होली के रंगों की छटा भावन, घट घट उमड़ता प्यार।

भाव भरी कविता लिखूं, गीतों के मधुर तराने।
सद्भावों की धाराएं, या कुदरती दृश्य सुहाने।

मुस्कानों के मोती लिख दूं, या नैनों से बहता नीर।
वीरों की तलवारे लिखूं, या शौर्य पराक्रम रणधीर।

 

रचनाकार : रमाकांत सोनी सुदर्शन

नवलगढ़ जिला झुंझुनू

( राजस्थान )

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