कोरोना से लड़ने का उपाय

Kavita Corona se Ladne ka Upay | कोरोना से लड़ने का उपाय

कोरोना से लड़ने का उपाय

( Corona se ladne ka upay )

 

घर में रहकर ही करें मौज मस्ती,
ये जिंदगी नहीं है सस्ती।
करें जीवन का एहतराम,
मस्ती कर मस्त रहें सुबह शाम।
घर में हैं तो हैं सुरक्षित,
बाहर निकलने की क्या है जरूरत?
जब बदलीं बदली सी हवा है,
बदली बदली सी फिजा है;
और तो और
इस वबा की न कोई दवा है।
सिर्फ एहतियात मास्क और
शारीरिक दूरी है उपाय,
इस आपदा से स्वयं को परिवार को लें बचाय।
मिलने जुलने के लिए है सोशल मीडिया,
उपयोग कर इन्हीं का करें शुक्रिया।
घर में ही रह कर मौज करें फिलहाल,
किसी तरह बीता लें संकट का यह काल।
जान है तो जहान है
गांठ यह बात मान लें।

नवाब मंजूर

लेखकमो.मंजूर आलम उर्फ नवाब मंजूर

सलेमपुर, छपरा, बिहार ।

यह भी पढ़ें : – 

Kavita Neta Ji | चुनाव क्यों न टले नेता जी कहें

 

Similar Posts

  • मैं पेड़ हूँ | Ped par Kavita

    मैं पेड़ हूँ ( Main ped hoon )   मैं हूॅं एक जंगल का पेड़, फैला हूँ दुनिया और देश। निर्धन या कोई हो धनवान, सेवा देता में सबको समान।। जीवन सबका मुझसे चलता, सांस सभी का मुझसे चलता। बदले में किसी से कुछ ना लेता, सारी उम्र सबको देता ही रहता।। पहले मेरा जंगल…

  • Kavita | अधरों पर मुस्कान है कविता

    अधरों पर मुस्कान है कविता ( Adharon par muskan hai kavita )   अधरों पर मुस्कान है कविता कवि ह्दय के भाव है कविता उर  पटल  पर  छाप छोड़ती सप्त सुरों की शान है कविता   वाणी का उद्गार है कविता वीणा की झंकार है कविता छू  जाती  मन  के तारों को देशभक्ति का गान…

  • सबसे जुदा अपनी अदा | Sabse juda apni ada | Kavita

    सबसे जुदा अपनी अदा ( Sabse juda apni ada )   सबसे जुदा अपनी अदा लगे मनभावन सी। इठलाती बलखाती और बरसते सावन सी।   हंसता मुस्कुराता चेहरा अंदाज निराला है। खुशियों में झूमता सदा बंदा मतवाला है।   मदमस्त चलता चाल मनभावन से नजारे हैं। सारी दुनिया से हटकर नखरे उसके न्यारे हैं।  …

  • समय बड़ा बलवान | Samay poem

    समय बड़ा बलवान ( Samay bada balwan )   वक्त वक्त की बात है, समय समय का फेर, विफलता हाथ लगे, हो जाती जब देर।   वक्त रहते संभल जा, पढ़े समय की मार, फूंक-फूंक कर रखे, कदम घर के बाहर।   वक्त सभी का आता, कालचक्र का खेल, जंग जीतता वही, कष्ट जो लेता…

  • जंग का सुरूर | Jang ka Suroor

    जंग का सुरूर ( Jang ka suroor )    हर कोई नशे में चल रहा यारों, तभी तो ये जग जल रहा यारों। अश्क में उबल रही पूरी कायनात, देखो सुख का सूरज ढल रहा यारों। पिला रहे पिलानेवाले बनकर साक़ी, क्यों यूएनओ नहीं संभल रहा यारों। इजराइल,हमास,रूस,यूक्रेन,अमेरिका पे, रोज जंग का सुरूर चढ़ रहा…

  • मेरी पहचान बता

    मेरी पहचान बता   मैं लड़की हूं इसे छोड़ मेरी पहचान बता घर मेरा मायका है या ससुराल मेरा मका बस एक बार तू मेरा पता बता   मैं लड़की हूं इसे छोड़ मेरी पहचान बता मैं अमृत हूं विष समझकर न सता मौन कर दिया तूने मुझे बेटे के समान बता   मैं लड़की…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *