हृदय मेरा पढ़ पाए

हृदय मेरा पढ़ पाए | kavita

हृदय मेरा पढ़ पाए

( Hriday mera padh paye )

 

अन्तर्मन में द्वंद बहुत है, जाकर किसे दिखाए।
ढूंढ रहा हूँ ऐसा मन जो, हृदय मेरा पढ़ पाए।

 

मन की व्याकुलता को समझे,और मुझे समझाए।
राह दिखे ना प्रतिद्वंदों से, तब मुझे राह दिखाए।

 

बोझिल मन पर मन रख करके,हल्के से मुस्काए।
मत घबराना साथ हूँ तेरे, कह कर धीर धराए।

 

जिसको देख शेर मन बोझिल, हुए बिना मुस्काए।
ढूंढ रहा हूँ ऐसा मन जो, हृदय मेरा पढ़ पाए।

 

चिन्ताओं से बिखर रहा मन, संसय बढ़ता जाए।
जब कोई भी राह दिखे ना, तब वो सामने आए।

 

जिसको देखते ही नयनों में,चमक स्वंय बढ़ जाए।
ढूंढ़ रहा हूँ ऐसा मन जो, हृदय मेरा पढ़ पाए।

 

मित्र सुदामा नही कृष्ण अर्जुन संग राह दिखाए।
प्रतिघातों के कुरूक्षेत्र में, रूप विराट दिखाए।

 

कभी सारथी कभी सहायक, स्वामी बन समझाए।
ढूंढ़ रहा हूँ ऐसा मन जो, हृदय मेरा पढ़ पाए।

 

स्वार्थ विरत हो दोनों का, जब साथ हो दुख न आए।
सारी दुनिया एक तरफ, जब मित्र साथ हो जाए।

 

शेर हृदय और व्याकुल मन के,हर तरंग पढ़ पाए।
ढूंढ रहा हूँ ऐसा मन जो, हृदय मेरा पढ़ पाए।

 

✍?

कवि :  शेर सिंह हुंकार

देवरिया ( उत्तर प्रदेश )

यह भी पढ़ें : –

बचपन के दिन | kavita

Similar Posts

  • कहाँ थे पहले?

    कहाँ थे पहले? खिड़की के हिलते पर्दों के पासतुम्हारी परछाईं नज़र आती हैकाश !तुम होते –ख़यालों में, कल्पनाओं मेंकितने रंग उभरते हैंदूर कहीं अतीत कीझील में डूब जाते हैंकभी लगता है, स्वप्न देख रही हूँकभी लगता है जाग रही हूँ यह बोझिल सन्नाटा, यादों का तूफ़ान,तुम्हारे ख़यालों की चुभती लहरें,मेरे भीतर कहीं टूटती, बिखरती,एक अनकही…

  • तुझ तक पहुंचने की चाह

    तुझ तक पहुंचने की चाह कोई मिल जाए जो तुझ तक पहुंचा दे,मेरे शब्द, मेरी सासें तुझ तक बहा दे।कि तू जान ले, आज भी प्रेम वहीं खड़ा है,तेरी राहों में, तेरी बाहों में, खुद को समेटे खड़ा है। चाहत की लौ बुझी नहीं है अब तक,तेरी यादों में जलती रही है अब तक।तेरे बिना…

  • यें फाल्गुनी महीना | Fagun Mahina par Kavita

    यें फाल्गुनी महीना ( Ye falguni mahina )    यें फाल्गुनी महीना होता है प्रकृति के लिए सौगात, जो प्रकृति के नज़रिये से महत्वपूर्ण धार्मिक मास। जिसके पश्चात होता है हिन्दू नए साल का आगाज़, हिन्दू पंचांग में साल का यही होता आख़िरी मास।। इसी महिनें में आतें है दो लोकप्रिय बड़े ही त्योंहार, जो…

  • मृत्यु | Kavita Mirtyu

    मृत्यु ( Mrtyu ) चाँदनी तारों भरी रात में किसी देवदूत ने छू लिया ज्यूं कोई सितारा आसमां से गोते लगाकर किसी ने ज्यूं उसे हरी धरती की गोद में उतारा कोई विशाल पक्षी ज्यूं ड़़रा रहा हो हवा के रुख को कुछ बादल के टुकड़े ज्यूं छिपा दें सूरज कुछ पल को नजरअंदाज कर…

  • पिया संग खेली होली | Kavita piya sang kheli holi

    पिया संग खेली होली ( Piya sang kheli holi )   भंग जब हमने पीली थी पिया संग खेली होली थी मस्ती में झूम गए सारे भीगी रंग में चूनर चोली थी तन-मन सारो हर्षायो रे रंगीलो फागुन आयो रे   बलम पिचकारी ले आयो खुशी को रंग मन छायो गाल पर रंग गुलाल लगायो…

  • शब्द सुंदर आईने है | Kavita shabd sundar aaine hai

    शब्द सुंदर आईने है ( Shabd sundar aaine hai )   काव्यधारा बन बहते लफ्जों के अथाह मायने है जीवन सफर में ढल जाते शब्द सुंदर आईने है   मुस्कान के मोती बनते दिल तक दस्तक दे जाते प्रीत की बगिया सुहानी मीठे बोल जीवन महकाते   झरनों से झरते रसीले लेकर अपनापन अनमोल बांटों…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *