Kavita keval pandrah minute

केवल पन्द्रह मिनट | Kavita keval pandrah minute

केवल पन्द्रह मिनट

( Keval pandrah minute )

 

1 – एक बात तू सुन ले चाईना
2 – दूसरी बार हम तो नही कहना
3 – तीसरी बार कर तीजे की तैयारी
4 – चौथी बार हम नही समझाना
5 – पांच मिनट में तेरे तम्बू समेट
6 – छ में छक्का लगा देगें हम
7 – सातवें में चक्कर काटता रहेगा
8 – आठ दिन तक उठ नही पाऐगा
9 – नौ में नो दो ग्यारह हो जाऐगा
10 – दसवे में ढ़ेर तू हो जाऐगा
11 – फिर कौन तेरे बच्चे संभालेगा
12 – बारवा कौन तेरा खाऐगा
13 – तेहरवा में कोई नही रहेगा तेरा
14 – चौदह दिनों तक सोचना मत
15 – पन्द्रह मिनट में तेरी सोच बता

 

रचनाकार : गणपत लाल उदय
अजमेर ( राजस्थान )

Similar Posts

  • इम्तहान बाकी है | Imtihan Baki hai

    इम्तहान बाकी है ( Imtihan baki hai )    अभी तो रास्ता शुरू हुआ है, असली इम्तहान तो बाकी है। अभी तो समंदर पार किया है, पूरा आसमान बाकी है। यह सिर्फ शुरुआत हुई है, अभी तो असली रास्ता बाकी है ! हिम्मत रख तू कीमत दे इस वक्त को, क्योकि अभी असली वक्त आना…

  • साहब | Sahab par Kavita

    साहब ( Sahab )   जब भी मुॅंह को खोले साहब। कड़वी बोली बोले साहब।   नफरत दिल में यूॅं पाले हैं, जैसे साॅंप, सॅंपोले साहब।   राजा के संग रंक को क्यों, एक तराजू तोले साहब।   भीतर कलिया नाग बसा है, बाहर से बम भोले साहब।   वोट के लिए दर-दर घूमे, बदल-बदल…

  • मुस्कान | Muskaan

    मुस्कान ( Muskaan )    ढा गई गजब मुस्कान तेरे होंठों की देखते ही रह गए झील सी आंखों मे गालों पर उतर आई केसों को लड़ी फेर गई मुस्कान हौले से मुझमें भी… जाने किस घड़ी मे रचा मालिक ने तुझे तुझ सी कोई और नजर आई ही नही समाई तू मुझमें या खुद…

  • मेरी कलम | Meri Kalam

    मेरी कलम ( Meri Kalam )   मेरी कलम मेरा साथ बखूबी निभाती है तन्हाई में भी आकर गले लगाती है कड़कती धूप में परछाई बन जाती है ठंड मे मखमल की चादर कहलाती है मैं रूठ जाऊँ अगर तो प्यार से मनाती है सजदे करूं तो दुआएं मेरी भी कहती है गलती पर टोकती…

  • सनातन धर्म हमारा | Kavita Sanatan Dharm Hamara

    सनातन धर्म हमारा ( Sanatan Dharm Hamara )   चिन्मयी पुंज,सनातन धर्म हमारा ********* सृष्टि संग अवतरण बिंब, अनंत अनुपमा आह्लाद । मानवता श्री वंदन सेतु, आनंदिता परम प्रसाद । वेद आभा अंतर्निहित, अविरल ओजस्विता धारा । चिन्मयी पुंज,सनातन धर्म हमारा ।। नैतिकता दिव्य रंग रुप, अपार आस्था सत्कार । धर्म कर्म पुनीत रश्मियां, जीवन…

  • टीआरपी का खेल!

    टीआरपी का खेल! ( व्यंग्य ) ***** टीआरपी के खेल में अबकी धरे गए हैं भैया, देखना है अब कैसे उन्हें बचाते हैं सैंया? चिल्ला चिल्ला कर तीन माह से- बांट रहे थे इंसाफ! हाईकोर्ट ने पल में मिला दिया उसे खाक। कह दिया रिया ‘ड्रग सिंडिकेट’ का हिस्सा नहीं, बनाओ स्वामी कहानी कोई और…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *