Kavita Mat Mar Pichkari

मत मार पिचकारी | Kavita Mat Mar Pichkari

मत मार पिचकारी

( Mat Mar Pichkari )

 

मत मार पिचकारी, मेरी भीगी चुनरिया सारी।
रंग मत डारे रे सांवरिया, मोहन मदन मुरारी।

रंग गुलाल उड़े फागुनी, मधुर बजे मुरली थारी।
झूम झूम गुजरिया नाचे, नाच रही राधा प्यारी।

चंग बजे बांसुरी की धुन, मस्त हुई दुनिया सारी।
रसिया मोहन प्यारे आजा, धूम मच रही भारी।

महक उठा मधुबन सारा, खिल गई है फुलवारी।
कृष्ण कन्हैया रंगरसिया, नटवर नगर बनवारी।

मोहनी मूरत मुरलीधर की, सांवरी सूरत सारी।
राधा प्रिय घनश्याम कान्हा, मीरा के गिरधारी।

मोर मुकुट मुरलीधर सोहे, केशव कुंज बिहारी।
प्रीत रंग में रंग गई राधा, भीगी चुनरिया सारी।

कवि : रमाकांत सोनी

नवलगढ़ जिला झुंझुनू

( राजस्थान )

यह भी पढ़ें :

बुरा ना मानो होली है | Kavita Bura na Mano Holi Hai

Similar Posts

  • Saraswati Vandana | सरस्वती वन्दना

    सरस्वती वन्दना ( Saraswati Vandana )   हे चन्द्र वदना ज्ञानदा, माँ भारती पदनिलया। बागीश्वरी सुरवन्दिता, चतुरानन साम्राज्या।   हे हंसवाहिनी श्रीप्रदा, हे महाभद्रा वरप्रदा। सौदामिनी वीणापणी, जटिला भामा भोगदा।   हे वाग्देवी भारती, माँ महाश्वेता शिवानुजा। इस सृष्टि की सम्पूर्णता, रस रंग की माधुर्यता।   तुमसे ही पुस्तक ज्ञान है, इस शेर को सम्मान…

  • शोहरतों का परचम | Poem shohraton ka parcham

    शोहरतों का परचम ( Shohraton ka parcham )   कीर्ति पताका यशस्वी हो जीवन संवार लीजिए। अपनापन अनमोल बांटकर सबको प्यार कीजिए।   शोहरतों का परचम लहरे शुभ काम हमारा हो। मुस्कानों के मोती सबको बहती नेह की धारा हो।   प्रीत बगिया खिल जाए सद्भावों से जी लीजिए। दिलों में चर्चा आपकी अहमियत सबको…

  • ऋतु गर्ग की कविताएं | Ritu Garg Poetry

    पढ़ी-लिखी बेटी मजबूत पीढ़ी बस यहां पर आकरमैं कमजोर हो जाती हूं! जब कोई पूछता हैबिटिया की शादी करोगी क्याअरे भाई !यह कोई पूछने की बात हैबेटियों को भी तो अपना घर बसाना है,उनको भी तो अपने घर जाना है। बस मैं यहां पर आकर,कमजोर हो जाती हूं! जब कोई पूछता है,बेटी को खाना बनाना…

  • पहचान | Pehchan

    पहचान ( Pehchan )  भीड़ मे शामिल जरूर हों वह कार्य विशेष की एकता का प्रतीक है किंतु ,आप भीड़ का नही अपने उद्देश्य का हिस्सा बनें… ऊंचाई पताका उठाने से नही मिलती पताका योग्य होना ही आपको आत्मविश्वासी बनाता है और ,आज नही तो कल यही आज की भीड़ कल आपके हिस्से की भीड़…

  • राजस्थान दिवस | Kavita Rajasthan Diwas

    राजस्थान दिवस ( Rajasthan Diwas )   चंबल की अदाओं पर,मरुस्थल की अंगड़ाई त्याग बलिदान शौर्य धरा, उत्सर्ग उपमित भव्य इतिहास । लोक कला संस्कृति अद्भुत, सर्वत्र दर्शन जन उल्लास । रजपूती माटी रज रज, अनंत सूरमा सुप्रभा जड़ाई । चंबल की अदाओं पर,मरुस्थल की अंगड़ाई ।। मिट्टी अंतर जोश उमंग, मलयज सम स्फूर्त बयार…

  • कथा सम्राट | Katha Samrat

    ‘कथा सम्राट’ ( Katha samrat )   सरल व्यक्तित्व के धनी नाम था धनपत राय, लमही गांव में जन्मे प्रसिद्ध कथाओं के सम्राट, संघर्षो से भरे जीवन को लेखनी में ऐसा ढाला। कालजयी हो गई फिर उपन्यासों की हरेक धारा, रचनाओं में जन- जीवन को गहराई से था उतारा। समाज की अव्यवस्थाओं पर किया कड़ा…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *