मै राही संघर्ष का | Mai Rahi Sangharsh ka

मै राही संघर्ष का

( Mai Rahi Sangharsh ka )

मै राही संघर्ष का, नित पथ में बढ़ता जाता हूं।
हर आंधी तूफानों से, फौलादी सा टकराता हूं।
मैं राही संघर्ष का

तीर सहे तलवार सहे, शब्दों के हर तीखे वार सहे।
हौसलों से दुश्चक्र मिटाए, जिंदा तन मन प्राण रहे।
जोश जज्बा हृदय में भरकर, गीत मन के गाता हूं।
सुख-दुख आते जाते रहते, सोच कदम बढ़ाता हूं।
मैं राही संघर्ष का

जीवन की चुनौती हर जंग में, जीवन के रंग में।
अपनों के संग में, मौसम के बदलते हर रंग में।
अधरो पर मुस्कान लिए, मैं मंद मंद मुस्काता हूं।
रिश्तो की डगर पर, संभल संभलकर जाता हूं।
मैं राही संघर्ष का

मतलब के इस जहां में, आन बान और शान में।
मनुज स्वाभिमान में, श्रद्धा रखकर भगवान मे।
दुर्गम राहे पथरीली सी, बाधाएं सम्मुख पाता हूं।
घोर घटाएं संकट घेरे, मुश्किल से भिड़ जाता हूं।
मैं राही संघर्ष का

कवि : रमाकांत सोनी

नवलगढ़ जिला झुंझुनू

( राजस्थान )

यह भी पढ़ें :

वो सुहाने पल | Kavita Wo Suhane Pal

Similar Posts

  • साथ | Saath

    साथ ( Saath )    मिलनेवाले तो मिल हि लेते हैं न मिलने वाले तो साथ रहकर भी मिल नही पाते खेल है सारा भावनाओं का बिन चाहत के हम जुड़ नही पाते साथ साथ चलना जरूरी नही होता दूर रहकर भी करीब रह लेते हैं लोग तन और धन का आखिर बजूद हि क्या…

  • पायल | Payal kavita

    पायल ( Payal )   कहीं सीमा का बंधन देखो कहीं रात अलबेली है पैरों की पायल है मेरी या जंजीर की बेडी है   रुके रुके कदमों से देखो अठखेली ये करती है रुनझुन रुनझुन करते करते सांझ सलोनी कटती है   छम छम करता बचपन बीता झनक झनक करते यौवन छनक छनक सी…

  • मां | Kavita maa

    मां ( Maa ) मां को समर्पित एक कविता     कहां है मेरी मां उससे मुझको मिला दो l हाथों का बना खाना मुझको खिला दो l   दो पल की जिंदगी मुझको दिला दो l एक बार गुस्से से अपनी डांट पिला दो l   फूल मेरे आंगन में मां तुम खिला दो…

  • मुझे गुरूर है कि | Kavita Mujhe Guroor hai

    मुझे गुरूर है कि ( Mujhe guroor hai ki )    मुझे गुरूर है कि मैं भारत देश का वासी हूं। लेखनी का दीप जलाता हरता हर उदासी हूं। लुटाता प्यार के मोती शब्दों की बहारों से। खुशियां ढूंढता रहता हंसी चेहरों नजारों में। मुझे गुरूर है बिटिया का पिता हूं मैं प्यारा। महके आंगन…

  • एक प्रेम कविता | Prem ki poem

    एक प्रेम कविता ( Ek prem kavita )    जब जब साथ तुम्हारा मिले यह ह्रदय मेरा प्रेम से खिले, फूलों से महक जाए हर खुशी भावनाओं में जैसे ये मन वहे ।। मैं एक प्रेम कविता बन जाऊं तू लिखे मुझे अपनी चाहत से , खाली समय में बस सोचे मुझे, तेरी ही एक…

  • खुद की खुद से मुलाकात

    खुद की खुद से मुलाकात जिंदगी की शाम से पहले खुद से खुद की मुलाकात बाकी है । इंतजार और नहीं फुर्सत के दो पल निकालना अभी बाकी है। आईने के सामने रोज आती हूं खुद को सजाना संवारना बाकी है । दिल को ख्वाहिश नहीं कोई ऐसा मिले जो मुझे समझ सके। अब तो…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *