Mannat

मन्नत | Mannat

मन्नत

( Mannat )

 

रूपसी हो तुम्हीं मेरी प्रेयसी हो
ग़ज़ल हो मेरी तुम्हीं शायरी हो
बहार हो तुम ही तन्हाई भी हो
जीवन की मेरे शहनाई भी तुम्ही

दो गज ज़मीन हो मेरी तुम ही
तुम ही फलक की रोशनी भी
कल्पना हो मेरे जज़्बातों की
तुम ही नर्म चादर हो खुशियों की

तुम ही से है धड़कन दिल की
तुम्हीं से है चैन ओ सुकून मेरा
दर्द भी तुम ही हो दवा भी तुम्हीं
निराशा और जुनून भी तुम्ही हो

कौन हो तुम मेरी पता नहीं मुझे
यकीन तो इतना है कि मेरी हो
तुमसे ही है अब यह वजूद मेरा
तुम ही मेरी अंतिम आरज़ू भी हो

देख ही नहीं पाते सिवा आपके
आप ही दोजख़ हो जन्नत हो
आप ही पूजा हो इबादत हो
आप ही मेरी आखिरी मन्नत हो

मोहन तिवारी

( मुंबई )

यह भी पढ़ें :-

बेपरवाही | Beparwahi

Similar Posts

  • उजाड़ो न दुनिया | Ujado na Duniya

    उजाड़ो न दुनिया ! ( Ujado na duniya )    पैग़म्बरों की जमीं,अम्न बोते चलो, जंग को जहां से बचाते चलो। बंट गई है दुनिया आज दो धड़ों में, लगी आग को तुम बुझाते चलो। फासला बढ़ा है लोगों के अंदर, दिल की दूरियाँ को घटाते चलो। नहीं थम रहे हैं आँसू जहां के, उदासी…

  • छोटी चीजें | Kavita Choti Chijen

    छोटी चीजें ( Choti Chijen )   छोटी चीज़ों पर नजर रखना बहुत बड़ा काम है छोटी चीज़ें ही जनम देती है विराट चीज़ों को पैदा होता है बरगद का पेड़ छोटे से बीज से देख लेती है छोटी-सी आँखे बड़ी दुनिया को शुरु होती है मीलों का सफर छोटे से कदम से फूटते हैं…

  • छत्रपती वीर शिवाजी महाराज | Chhatrapati Veer Shivaji Maharaj

    छत्रपती वीर शिवाजी महाराज ( Chhatrapati Veer Shivaji Maharaj )  मराठा साम्राज्य नींव से,हिंदुत्व का सिंहनाद हिंद पटल उन्नीस फरवरी, अद्भुत अनुपम भाव नवेला । वर्ष सोलह सौ पचास तद तिथि, वीर शिरोमणि अवतरण बेला । विदेशी विधर्मी आक्रांता पस्त, देख शिवाजी स्व शासन शंखनाद। मराठा साम्राज्य नींव से,हिंदुत्व का सिंहनाद ।। शिवनेरी दुर्ग पुनीत…

  • कमल | Poem on Kamal ka Phool in Hindi

    कमल ( Kamal )   कमल का विमल रूप,यश वैभव प्रदायक उद्गम स्थल कर्दममय, उरस्थ प्रेरणा संदेश । निर्माण आर्दश चरित्र, आभा शांति संजेश । वंदन मां वीणा वादिनी, ज्ञानोदय पथ परिचायक । कमल का विमल रूप,यश वैभव प्रदायक ।। गणतंत्र दिवस श्री बेला, राष्ट्र पुष्प दिव्य आभा । शोभित उन्नत राष्ट्रीयता , अनुभूत स्नेहिल…

  • May Danava | मय दानव (महाभारत)

    मय दानव ( महाभारत ) ( May Danava  )   खाण्डव वन में मय दानव ने, इन्द्रप्रस्थ रच डाला। माया से उसने धरती पर,कुछ ऐसा महल बनाया।   अद्भुत उसकी वास्तु शिल्प थी,कुछ प्रतिशोध भरे थे, जिसके कारण ही भारत में, महाभारत युद्ध कराया।   कौरव ने जब खाण्डव वन को, पाण्डवों को दे डाला।…

  • क़लम की ताकत: एक लेखिका की जुबानी

    क़लम की ताकत मेरी क़लम है मेरी जुबां,जिससे कहती हूँ हर दास्तां।हर दर्द, हर खुशी के रंग,इसी से रचती हूँ मैं जीवन के ढंग। यह स्याही नहीं, यह भावना है,जो दिल से निकल, कागज पर थामना है।हर अक्षर में बसती है एक सदी,यह कलम तो मेरे सपनों की नदी। कभी चुप रहकर चीखती है,अन्याय पर…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *