मौसम खिजां का सीने में ग़म की बहार है
मौसम खिजां का सीने में ग़म की बहार है

मौसम खिजां का सीने में ग़म की बहार है

( Mausam Khijaan Ka Sine Mein Gam Ki Bahar Hai )

 

मौसम ख़िजा का सीने में ग़म की बहार है।
उजङा चमन ये गुल बिना कांटे हजार है।।

 

कैसे करें विश्वास फिर दुनिया-जहां का हम।
साथी कोई जग में नहीं दुश्मन अपार है।।

 

कैसे  कटेगी  फिर  भला उमरे -दराज़ ये।
दिल में है उनके नफरतें बातों में प्यार है।।

 

कैसे सुनाए हाल-ए-दिल महफिले -दौर में।
टूटे  हुए  से  वीणा-ए-दिल  के  ये तार है।।

 

अंदाज  ही  कुछ  आपका बदला है आज तो।
आंखों में मस्ती प्यार की दिल में ख़ुमार है।।

 

पत्ते  नए  भी  आते  है  पतझड़  के बाद में।
इतना ख़फा सा क्यूं भला तू यूं “कुमार” है।।

 

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कवि व शायर: Ⓜ मुनीश कुमार “कुमार”
(हिंदी लैक्चरर )
GSS School ढाठरथ
जींद (हरियाणा)

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