Narayan Hari

कण कण पाए हरि | Narayan Hari

कण कण पाए हरि

( Kan kan paye hari )

हरिहरण घनाक्षरी

 

घट घट वासी हरि, रग रग बसे हरि।
रोम रोम रहे हरि, सांस सांस मिले हरि।

कण कण पाए हरि, जन मन भाए हरि।
घर घर आए हरि,भजो राम हरि हरि।

पीर हर लेते हरि, भव पार करे हरि।
यश कीर्ति देते हरि,आय झोली भरे हरि।

नर नारायण हरि, भक्त पारायण हरि।
भव तारायण हरि, नाम रसायन हरि।

 

कवि : रमाकांत सोनी

नवलगढ़ जिला झुंझुनू

( राजस्थान )

यह भी पढ़ें :-

दया | Daya

Similar Posts

  • समांं महका दो आज | Chhand

    समांं महका दो आज (  मनहरण घनाक्षरी छंद )   गीतों का सजाओ साज समां महका दो आज झड़ी बरसाओ ऐसी धूम होनी चाहिए   खूब गाओ छंद गीत मुक्त कंठ नव गीत रस बरसे प्रेम का भाव होना चाहिए   शौर्य पर लिखो गीत योद्धा जंग जाए जीत हिम्मत हौसला मिले ओज होना चाहिए…

  • आया बसंत सुहाना | Chhand Aaya Basant Suhana

    आया बसंत सुहाना ( Aaya basant suhana )   जलहरण घनाक्षरी   आया बसंत सुहाना, उपवन महका रे। झूम झूम नाचे गाते, सारे ठहर ठहर।   फागुन की मस्ती छाई, रूत ये सुहानी आई। मधुमास महकता, आया लहर लहर।   सरसों लहलहाई, मस्त चली पुरवाई। बहार ले अंगड़ाई, चली सहर सहर।   धमालो की थाप…

  • मतदान | मनहरण घनाक्षरी | Poem on voting in Hindi

    मतदान ( Matdan )   चुने हम सरकार सबका है अधिकार राष्ट्र निर्माण करने मतदान कीजिए   मतदान महादान अधिकार पहचान लोकतंत्र मजबूत कर वोट दीजिए   सशक्त हो जनादेश मतदान है विशेष सोच समझ अमूल्य वोट जरा दीजिए   उम्मीदवार खरा हो वो राष्ट्रप्रेम भरा हो स्वच्छ छवि रखता हो चुन जरा लीजिए    …

  • रक्तदान | Raktdan par chhand

    रक्तदान ( Raktdan ) मनहरण घनाक्षरी   रक्तदान महादान, देता है जीवन दान। जीवन बचाएं हम, रक्तदान कीजिए।   आओ बचाएं सबका, जीवन अनमोल है। मानव धर्म हमारा, पुण्य कार्य कीजिए।   सांसो की डोर बचाले, जोड़े रक्त का नाता भी। जरूरतमंद कोई, रक्त दान दीजिए।   किस्मत संवर जाती, भाग्य के खुलते द्वार। परोपकार…

  • भीनी भीनी चांदनी | Chhand bhini bhini chandni

    भीनी भीनी चांदनी ( Bhini bhini chandni ) विधा मनहरण घनाक्षरी     उज्जवल उज्जवल, भीनी भीनी मद्धम सी। दूधिया सी भीगो रही, दिव्य भीनी चांदनी।   धवल आभा बरस, सुधा रस बांट रही। आनंद का अहसास, देती भीनी चांदनी।   चांद यूं छलका रहा, अमृत रस भंडार। हर्ष खुशी मोद करे, दुलार भीनी चांदनी‌।…

  • जग से निराला लगे,

    जग से निराला लगे रूप घनाक्षरीमनमीत-8,8,8,8चरणांत -21 जग से निराला लगे,सबसे ही प्यारा लगे,छेड़े जब प्रेम धुन,वह राग मनमीत । मुख आभा लगे ऐसी,पूनम के चाॅ॑द जैसी,मुख शोभित लालिमा,ज्यों रजनी चाॅ॑दप्रीत । दीप उजियार करे,घर की है शोभा बढ़े,दमक रहे जुगनू,ऐसे लगे नैन जीत । अजब सी लीला देखो,प्रेम रस जरा चखो,कहे फिर सारा जग,है…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *